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भारत में विद्युत शक्ति का युद्धोत्तर विकास

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बारे में चुप हो गए। वे तब आगे जब 1918 में भारतीय औद्योगिक आयोग की रिपोर्ट द्वारा बिजली में सक्रिय रुचि की तात्कालिता पर बल दिया गया और भारतीय सैन्य सामग्री बोर्ड ने भी अपनी रिपोर्ट में, जो एक वर्ष बाद प्रकाशित की गई, इस बात पर जोर दिया।

औद्योगिक आयोग ने भारत के जल सर्वेक्षण की आवश्यकता की सिफारिश की और यह कहा कि यह सर्वेक्षण निजी उद्यम की अपेक्षा सरकार द्वारा हाथ में लिया जाए। भारत सरकार ने इस सिफारिश को स्वीकार कर लिया और संयुक्त प्रांत की सिंचाई शाखा के पूर्व चीफ इंजीनियर स्वर्गीय श्री जी. टी. बारलो, सी.आई.ई. को चीफ इंजीनियर के रूप में जल सर्वेक्षण का कार्यभार संभालने के लिए नियुक्त किया। इस जांच कार्य में उनके साथ भारत सरकार के विद्युत सलाहकार श्री जे. एम. मीरेस, एम. आई. सी. ई. को सहयोगी बनाया गया। श्री बारलो के निधन के बाद शीघ्र ही उनका कार्य श्री मीरेस द्वारा किया जाने लगा जिन्होंने 1919 और 1922 के दौरान तीन अत्यंत उत्कृष्ट रिपोर्टें प्रस्तुत कीं जिनमें पांच शीर्षकों के अंतर्गत विद्युत सप्लाई की संभावनाओं के संबंध में प्रांत दर प्रांत सूचना दी गई थी। ये शीर्षक इस प्रकार थेः (1) पहले ही से विकसित जल-विद्युत_ (2) निर्माणाधीन विद्युत संयंत्र_ (3) खोजे गए क्षेत्र परंतु जिनका विकास नहीं किया गया_ (4) ज्ञात स्थल जिनके बारे में विस्तृत जांच वांछनीय है_ और (5) ऐसे क्षेत्र और स्थल जिनकी खोज नहीं की गई।

बिजली - एक प्रांतीय विषय

दुर्भाग्यवश, 1919 के अधिनियम के अंतर्गत भारत सरकार में किए गए परिवर्तनों के परिणामस्वरूप, बिजली को प्रांतीय विषय बना दिया गया। इस अधिनियम में दुर्भाग्यवश ऐसा कोई उपबंध नहीं था जैसाकि कि मौजूदा अधिनियम में है जो केंद्र सरकार को यह अनुमति देता है कि वह अपने राजस्व को ऐसे मुद्दों पर व्यय करे जो वह उपयुक्त और उचित समझे, यद्यपि वे इसके प्रशासन के क्षेत्र के बाहर थे। इसका परिणाम यह हुआ कि भारत सरकार के लिए यह असंभव हो गया कि जल-सर्वेक्षण को वित्तपोषित कर सके। भारत को विद्युत मुहैया कराए जाने का श्रेष्ठ, महान और आवश्यक कार्य समाप्त हो गया।

केंद्र में ऐसा कोई अधिकारी नहीं है जो भारत में बिजली के विकास का प्रभारी हो। इसका परिणाम यह हुआ कि हमें केंद्र में अभी तक कोई आंकड़े प्राप्त नहीं थे जिनका संबंध भारत में उत्पादन, वितरण और प्रशासन से हो।

अंतः मुझे इस बात से प्रसन्नता है कि भारत में बिजली से संबंधित विषय एक बार फिर गंभीर विचार के लिए सामने आया है। वहां तक मैं इसका पूर्वानुमान करने