114 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
के योग्य हूं, ऐसे प्रश्न जो इस समिति के लिए चिंताजनक होने चाहिए, वे हैंः
(1) क्या बिजली निजी क्षेत्र के पास होनी चाहिए अथवा इसका स्वामित्व राजय का होना चाहिए?
(2) यदि बिजली निजी स्वामित्व में हो, तो क्या ऐसी भी शर्तों लगाई जाएं जो सार्वजनिक हितों की रक्षा के लिए आवश्यक हों?
(3) बिजली के विकास का उत्तरदायित्व केंद्र सरकार का हो अथवा प्रांतीय सरकारों का?
(4) यदि यह उत्तरदायित्व केंद्र सरकार का है, तो इसके प्रशासन का सबसे प्रभावकारी तरीका क्या हो ताकि बिजली की सस्ती और प्रचुर आपूर्ति की जा सके और संसाधनों को बर्बाद होने से बचाया जा सके।
(5) यदि यह उत्तरदायित्व प्रांतों का है, तो क्या प्रांतों में इसका प्रशासन एक अंतःप्रांतीय बोर्ड के अधीन हो जिसका परामर्श देने तथा समन्वय करने की शक्ति भी प्राप्त हो?
तीन विचार
इन प्रश्नों में से प्रत्येक प्रश्न के दो पहलू हैं। प्रत्येक पक्ष के अपने समर्थक हैं। मैं इस समय अपना कोई भी मत व्यक्त नहीं करना चाहता। मेरा खुला दिमाग हैं, परंतु यह विचारहीन दिमाग नहीं है। मैं जो कुछ भी कहना चाहता हूं उनसे ऐसे निष्कर्षों पर आना चाहता हूं जिनके द्वारा बिजली के विकास का बेहतर तरीका उपलब्ध हो सके। अतः हमें अपने मस्तिष्क में ये तीन बातें रखनी होंगीः
(1) दोनों में से किससे हमें बिजली कम कीमत पर ही नहीं अपितु सबसे कम कीमत पर मिल सकती है_
(2) दोनों में से किससे हमें बिजली केवल पर्याप्त रूप में ही नहीं अपितु प्रचुर मात्रा में भी मिल सकती है_ और
(3) दोनों में से कौन सा तरीका हमें महत्वपूर्ण रेलवे के समान ही भारत में बिजली की उपलब्धि सुनिश्चित करेगा, अर्थात तात्कालिक लाभ के विचार के बिना एक उपक्रम के रूप में इसे प्रारंभ किया जाना।
मैं उपरोक्त विचारों पर जोर देता हूं क्योंकि भारत चाहता है कि उसे सस्ती बिजली और प्रचुर मात्रा में बिजली की सप्लाई आश्वस्त की जाए।