भारत में विद्युत शक्ति का युद्धोत्तर विकास
115
ये प्राथमिक प्रश्न हैं। आपमें से कुछ के मन में इनके बारे में इस आधार पर संशय उत्पन्न हो सकता है कि इनमें से अधिकांश प्रश्नों से संविधान में संशोधन करने का मुद्दा उठता है। जहां तक मेरा संबंध है, मुझे किसी प्रकार का कोई संशय नहीं है। संवैधानिक मामले पर निर्णय करने और उस पर मत अभिव्यक्त करने में अंतर होता है। हम संवैधानिक प्रश्नों पर निर्णय नहीं करेंगे। हम उनके संबंध में केवल अपने मत अभिव्यक्त करेंगे। हम इस पर विचार करने से महज इस कारण वंचित हीं हो जाते कि ये प्रश्न संवैधानिक प्रकृति के हैं। मुझे पूरा विश्वास है यदि हमें इस विषय पर न्याय करना है जो हमें सौंपा गया है, तो इनसे बच नहीं सकते, हमेंं इन प्रश्नों का विचार करना ही होगा।
बिजली आपूर्ति विभाग
इन प्रमुख प्रश्नों के अलावा कुछ अन्य प्रश्न भी हैं जिन्हें गौण स्थान नहीं दिया जा सकता। यदि विद्युतिकरण में सफलता प्राप्त की जानी है, तो इन प्रश्नों पर भी हमें विचार करना होगा। ये प्रश्न हैः-
(1) क्या केंद्र में बिजली सप्लाई विभाग की स्थापना आवश्यक है जिसका कर्तव्य उपलब्ध बहुत-स्रोतों यथा कोयला, पेट्रोल, अल्कोहल और प्रवाहित जल आदि का विधिवत सर्वेक्षण करना तथा उत्पादन-क्षमता को बढ़ोन के लिए उपाय और साधनों के सुझाव देना हो?
(2) क्या यह आवश्यक है कि केंद्र में विद्युत अनुसंधान ब्यूरो की स्थापना की जाए ताकि विद्युत के स्रोतों और व्यवस्था तंत्र के बीच संबंध के बारे में समस्याओं का अध्ययन किया जा सके जिससे उपलब्ध बिजली का अधिकतम दक्षता से उपयोग हो सके?
(3) क्या यह आवश्यक है कि विद्युत प्रौद्योगिकी में भारतीयों को प्रशिक्षित करने के लिए कुछ उपाय किए जाएं ताकि भारत को ऐसे कर्मचारी मिल सकें जो विद्युत संयंत्र तथा उपकरणों के निर्माण, अनुरक्षण और सुधार की योजनाओं का निर्माण और क्रियान्वयन कर सकें?
इससे पूर्व कि मैं अपने भाषण का समापन करूं, मैं कुछ बातें कहना चाहूंगा जो भारत में विद्युत विकास की आवश्यकता का महत्व और लक्ष्य दर्शाती हैं। यह आवश्यक है कि जो लोग भी इस विषय के प्रभारी बनाए जाएं, उन्हें इस महत्व और उद्देश्य को पूर्णतया समझना चाहिए। यदि आप मुझसे इस मामले में सहमत हैं, तो मैं आपसे यह निवेदन करूंगा कि आप आपने से यह प्रश्न पूछिए कि ‘‘हम भारत में सस्ती और प्रचुर मात्रा में बिजली क्यों चाहते हैं?’’ इस प्रश्न का उत्तर यह है