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ऽश्रम-सदस्य की कोयला खानों की यात्रा
काम करने की परिस्थितियों और खान मजदूरों के आवासों का निरीक्षण
भारत सरकार के श्रम सदस्य, डॉक्टर बी. आर. अम्बेडकर बृहस्पतिवार 9 दिसम्बर को कोयले की खानों में काम की परिस्थितियों के अध्ययन के लिए धनबाद पहुंचे। अनेक स्थानीय कर्मचारी जिनमें बिहार के श्रम आयुक्त, श्री एस.एन. मजूमदार,
खानों के मुख्य निरीक्षक, श्री डब्ल्यू, किर्बी, विभिन्न खनन संघों के प्रतिनिधि तथा कोयला खानों के मालिक भी शामिल थे, उनके स्वागत के लिए आये। श्रम विभाग के सचिव, श्री एच. सी. प्रायर और भारत सरकार के श्रम कल्याण सलाहकार, श्री आर. एस. निम्बकर भी उस दिन पहले ही वहां पहुंच गए थे।
श्रम सदस्य ने, आगमन के तुरंत बाद, खानों के मुख्य निरीक्षक, खानों के मालिक, श्री प्रायर और श्री निम्बकर के साथ भुलनबरारी की कोयला खान के लिए प्रस्थान किया। मजदूरों के प्रतिनिधि, श्री कर्णिक, जो भारतीय श्रमिक संघ के प्रतिनिधि थे और कुमारी शांता मालराव, जो अखिल भारतीय मजदूर संघ कांग्रेस की प्रतिनिधि थीं, कोयला खानों की कार्य-परिस्थितियों के अध्ययन के लिए इस दल के साथ गई। इस कार्यक्रम में भूमि पर तथा भूमि के नीचे दोनों स्थलों पर कार्य की परिस्थितियों का निरीक्षण सम्मिलित था।
भूमि के 400 फुट नीचे
फौज में प्रयुक्त टीन के बने टोपों की तरह के ‘सुरक्षा टोप’ पहन कर श्रम सदस्य तथा दल के अन्य सदस्य जमीन के 400 फुट नीचे दो पारियों में गए जहां उन्होंने मजदूरों को कोयला काटते हुए देखा। कोयला खानों में महिलाओं को काम करने की निषेधाज्ञा के हटने के फलस्वरूप, हाल ही में काम पर लगाई गई कुछ महिलाएं भी वहां दिखाई दीं। श्रम सदस्य, श्री निम्बकर और दल के अन्य सदस्यों ने मजदूरों से उनकी मजदूरी तथा आय के बारे में अनेक प्रश्न किए।
ऽ इंडियन इन्फॉर्मेशन, 1 जनवरी, 1944, पृष्ठ 39-40