22. श्रम सदस्य की कोयला-खानों की यात्रा - Page 148

श्रम-सदस्य की कोयला खानों की यात्रा

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खान में काम करने वालों के कल्याण और चिकित्सीय सहायता के लिए शिवपुर कोयला खान के मालिकों द्वारा किए गए प्रबंधों की जांच से निरीक्षण-कार्य प्रारंभ किया गया। इसके बाद दल को एक मंजिली चौकोर श्वेत अस्पताल में ले जाया गया जहां आधुनिक एक्स-रे उपकरण और अन्य शल्य-चिकित्सा के साज-सामान थे। यह बताया गया कि यह अस्पताल शीघ्र ही कार्य करने लगेगा।

दोपहर के बाद श्रम सदस्य कुष्ट कल्याण केंद्र गए जहां कुष्ट रोग का आरंभिक अवस्थाओं में प्रभावकारी उपचार किया जा सकता है। डॉ. अम्बेडकर ने एक और भवन का निरीक्षण किया जिसमें शिशु कल्याण केंद्र स्थित था जहां उन्होंने खान में काम करने वालों के दुर्बल बच्चों को देखा जिनकी देखभाल आया करती थी। श्रम सदस्य ने इन कल्याणकारी प्रयत्नों की सराहना की, परंतु यह पूछा कि बच्चे इतने दुबले-पतले क्यों हैं। उन्हें बताया गया कि यह दशा उनके आहार में पोषक तत्वों की कमी के कारण है।

खनिकों के बच्चों का स्कूल

सीतापुर खान को जाने वाली वर्तुलाकार सड़क पर दल ने एक प्राइमरी स्कूल का निरीक्षण किया जहां खान में काम करने वाले बच्चों ने डॉक्टर अम्बेडकर को फूलमलाएं पहनाई। श्रम सदस्य ने एक सात-वर्षीय बच्चे के साथ बातचीत की। यह बच्चा खान में काम करने वाले का था। इस बच्चे ने रुक-रुक कर परंतु समझ में आने वाली अंग्रेजी में अपने परिवार की आय के बारे में बताया।

इससे पूर्व, दल ने सोधपुर के भराई-संयंत्र का निरीक्षण किया। यह एक विशाल यांत्रिक उपकरण है जो पड़ोस में दामोदर बेसिन से प्रति घंटा 200 टन मिट्टी हटाता है और स्वतःचालित रोपवे के सहारे खानों तक ले जाता है।

दल ने सीतापुर स्थित कोयले की खान के अंदर की दशा का भी निरीक्षण किया। दल के सदस्य लगभग 1000 फुट नीचे उतरे और उन्होंने आधुनिकतम कोयला काटने वाली मशीनों द्वारा कोयला उठाने की प्रक्रिया देखी।

धनबाद लौटते समय मार्ग में श्रम सदस्य ने ‘धौरस’ (एक कमरे के घरों) का बेगुनिया कोयले की खान के मजदूरों की बस्ती में परीक्षण किया। कमरों में अंधेरा था और एक स्थान पर उन्होंने एक गाय का बछड़ा देखा जो धीरे-धीरे सूखी घास बचा रहा था और एक छोटे बरामदे में बहुत कम स्थान में कुछ लोग रह रहे थे। डॉक्टर अम्बेडकर ने उस घर में रहने वालों से बातचीत की। उन्हें बताया गया कि मजदूरों को अपने घरेलू उपयोग के लिए पर्याप्त मात्रा में कोयला निःशुल्क मिलता है। उन्होंने मजदूरों के भोजन, कपड़ों और स्वास्थ्य के बारे में भी जानकारी हासिल की।