124 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
धनबाद में श्रमिकों की समस्याओं पर चचा र्
कोयले की वर्तमान कमी के कारणों और उस कमी को दूर करने के उपायों के बारे में शनिवार को धनबाद में आयोजित सम्मेलन में विचार-विमर्श किया गया। इस सम्मेलन में केंद्रीय सरकार, बंगाल और बिहार की सरकारों तथा खनिज कार्यों में संलग्न तीन संघों व श्रमिकों के प्रतिनिधि सम्मिलित थे। इस सम्मेलन की अध्यक्षता श्रम सदस्य माननीय डॉक्टर अम्बेडकर ने की।
अध्यक्ष ने अपने संक्षिप्त प्रारंभिक भाषण में इस सम्मेलन की ऐसे त्रिपक्षीय सम्मेलनों से तुलना की जहां औद्योगिक श्रमिकों से संबंधित प्रश्नों पर विचार किया जाता है। उन्होंने भारत के उद्योगों के अधिक उत्पादन पर जोर दिया और यह आशा व्यक्त की कि नियोक्ताओं तथा कर्मचारियों के प्रतिनिधि इस मामले में अपनी सर्वोत्तम सलाह देंगे।
श्रमिकों की कमी के कारण बताए गए और कहा गया कि ‘‘अधिक अन्न उपजाओं’’ आंदोलन के कारण अच्छी फसल होने से फसल काटने के समय श्रमिक
खेतों पर चले जाते हैं जिससे उनकी संख्या यहां कम हो जाती है और युद्ध प्रयासों के कार्यों के लिए भी अधिक श्रमिकों की आवश्यकता होती है। इस परिस्थिति का सामना करने के उपायों पर विचार-विमर्श किया गया। नियोक्ताओं के प्रतिनिधियों ने अधिक पेट्रोल और टायरों की मांग की ताकि समीपवर्ती गांवों से इन कोयले की
खानों में अधिक श्रमिक लाए जाएं।
कुछ समय पूर्व केंद्र सरकार द्वार राशन की एक योजना का प्रस्ताव रखा गया था जिसका उद्देश्य खानों में काम करने वालों को पर्याप्त राशन उपलब्ध कराना था। यह विषय कार्यसूची में दूसरा विषय था। इस विचार-विमर्श के दौरन उस क्षेत्र में बिहार सरकार द्वारा राशनिंग योजना प्रारंभ किए जाने की संभावना का उल्लेख किया गया तथा यह निर्णय लिया गया कि यदि ऐसा हो तो खानों में प्रारंभ की गई योजना पर पुनः विचार किया जाए।
खानों में काम करने वालों के लिए आपूर्ति की योजना में उन मजदूरों के आश्रितों को खाद्यान्न प्रदान करने की व्यवस्था सम्मिलित है। योजना के अनुसार, सप्ताह में कम से कम पांच दिन कार्य करने पर पूरे सप्ताह का राशन दिया जाएगा, परंतु उन लोगों के लिए भी पर्याप्त राशन की व्यवस्था की जाएगी जो इससे कम दिन काम करें। यह सहमति हुई कि मजदूरों को प्रारंभ में प्रति रुपए छह सेर की दर से चावल बेचा जाएगा और इसी भाव पर आवश्यक मात्रा में दाल भी दी जाएगी।
इस सम्मेलन में केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित एक अन्य योजना पर भी विचार-विमर्श किया गया ताकि अन्य सामान यथा नमक, सरसों का तेल, मानक कपड़ा और अन्य