श्रम-सदस्य की कोयला खानों की यात्रा
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उपभोक्ता वस्तुएं मजदूरों को मुहैया की जाएं। यह भी तय हुआ कि राशन का सामान
खनन-संघों को दिया जाए और वे इसे आगे खानों के श्रमिकों में वितरित करें। सरकार द्वारा खान-मजदूरों के कल्याण के लिए प्रस्तावित अन्य उपायों के साथ-साथ कल्याण कर की उस योजना पर विचार किया गया जिसे लागू करके एक कोष स्थापित किया जाना था ताकि इसमें से उनके कल्याणार्थ व्यय किया जा सके। उन सभी खानों में एक कल्याण अधिकारी की नियुक्ति का प्रस्ताव भी रखा गया जहां 100,000 टन से अधिक उत्पादन होता है।
मजदूरी में वृद्धि
सम्मेलन की कार्यसूची में खानों के कामगारों की मजदूरी से संबंधित कई मुद्दे शामिल थे, और खनन संघ 1939 में दी जा रही मजदूरी में और अधिक वृद्धि के लिए तैयार प्रतीत हुए जिसके परिणामस्वरूप इस मजदूरी में युद्ध में पूर्व काल की मजदूरी से 50 प्रतिशत हो गई। फिर भी उन्हें यह आशंका थी कि जब तक कोयला-क्षेत्र में उपभोक्ता वस्तुएं पर्याप्त मात्रा में मुहैया नहीं कराई जाएंगी यह वृद्धि व्यर्थ होगी और इसलिए यह बात सुनिश्चित करने की आवश्यकता स्वीकार की गई।
कुछ अन्य मदें जिन पर विचार-विमर्श किया गया वे थीं कोयले की खानों के लिए मजदूरी भुगतान अधिनियम के लागू किए जाने की संभावनाएं और कोयला उद्योग में इसके लागू किए जाने की कुछ कठिनाइयां। अतिरिक्त लाभ कर तथा मशीनों की व्यवस्था से संबंधित मामलों में सहायता के लिए उद्योग क्षेत्र से प्राप्त निवेदनों पर भी विचार किया गया।