128 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
सत्र के दौरान प्रारंभ में, समिति ने औद्योगिक उपक्रमों में मजदूरों के लिए भोजन तथा जलपान की कैंटीनों के बारे में हुई प्रगति की समीक्षा की। यह मालूम हुआ कि कठिनाइयों के बावजूद ये कैंटीन पर्याप्त संख्या में चल रही थी। और मजदूरों में बड़ी लोकप्रिय साबित हो रही थी।
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ऽकोयला खान श्रमिक कल्याण अध्यादेश, 1944
‘‘कोयला खान श्रमिक कल्याण अध्यादेश, 1944’’ नामक अध्यादेश आज जारी किया गया है जिसके अनुसार कोयला खनन उद्योग में काम कर रहे श्रमिकों के कल्याण को प्रोत्साहित करने वाले कार्यकलापों को वित्तपोषित करने के लिए एक कोष बनाया गया है। इस अध्यादेश के अंतर्गत पूरा ब्रिटिश इंडिया आता है और इसे शीघ्र ही लागू किया जाएगा जैसा कि भारत सरकार के श्रम विभाग द्वारा 31 जनवरी को परिचालित प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है। प्रेस विज्ञप्ति में आगे बताया गयाः
इस कोष को बनाने के लिए, केंद्र सरकार ब्रिटिश इंडिया की कोयले को खानों से रेल द्वारा भेजे गए सभी प्रकार के कोयले और सॉफटकोक पर कर लगाएगी जिसकी दर समय-समय पर निर्धारित की जाएगी और सलाहकार समिति से परामर्श करने के बाद भारतीय गजट में विज्ञप्ति द्वारा प्रकाशित की जाएगी। यह कर प्रति टन एक आना से कम नहीं होगा और चार आना से अधिक नहीं होगा। यह कर भारत सरकार की ओर से रेलवे प्रकाशन द्वारा, जो कोयले अथवा सॉफटकोक का परिवहन करता है, एकत्रित किया जाएगा।
इस अध्यादेश में सामान्यतय व्यवस्था की गई है कि इस प्रकार प्राप्त राशि श्रम कल्याण कोष में जमा की जाएगी ताकि कोयला खनन उद्योग में लगे श्रमिकों के कल्याण के विकास में होने वाले व्यय की भरपाई की जा सके। इस अध्यादेश में ऐसी अनेक मदें विर्निदिष्ट हैं जिनके लिए विशेष रूप से कोष का उपयोग किया जा सकता है। इस कोष द्वारा वित्तपोषित श्रमिक कल्याण कार्यक्रम का उद्देश्य गृह उपलब्ध कराना, जल आपूर्ति, धोने की सुविधाएं, शैक्षिक सुविधाओं में सुधार और कामगारों के रहन-सहन के स्तर को, पोषण, सामाजिक परिस्थितियों में सुधार, मनोरंजन की सुविधाओं और परिवहन सुविधाओं द्वारा ऊंचा उठाना है।
जन स्वास्थ्य और स्वच्छता में सुधार, व्यवस्था और मौजूदा सुविधाओं में सुधार भी इसमें सम्मिलित किए गए हैं। इसी कोष में से प्रांतीय सरकार स्थानीय प्राधिकरण
ऽ इंडियन इन्फॉर्मेशन, 15 फरवरी, 1944, पृष्ठ 151-52