24. कोयले की खानों में भूमिगत कार्यों में महिलाओं की नियुक्ति पर लगाए गए प्रतिबंध का उठाया जाना - Page 155

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ऽकोयले की खानों में भूमिगत कार्यों में महिलाओं की
नियुक्ति पर लगाए गए प्रतिबंध का उठाया जाना

माननीय डॉ. बी. आर अम्बेडक र (श्रम सदस्य)ः श्रीमन्, मैं इस बात से प्रसन्न हूं कि हमारी महिला सदस्यों ने यह स्थगन प्रस्ताव लाने की बात सोची। मुझे इसलिए प्रसन्नता है कि मुझे इस सदन को एक ऐसे मामले का स्पष्टीकरण करने का अवसर मिला है जो मेरे मस्तिष्क में बोझा बना हुआ था। मैं प्रारंभ में ही यह कहना चाहूंगा कि यह सदन इस मामले में मेरी भावनाओं को समझे क्योंकि मैं भारत सरकार के इस निर्णय को बहुत दुर्भाग्यपूर्ण मानता हूं। मैं इस निर्णय से खुश नहीं हूं। मैं यहीं कहना चाहूंगा कि कुछ परिस्थितियों में भारत सरकार बाध्य हो गई थी और मैं यह नहीं समझता कि यह हमारी कोई भूल है। मैं समझता हूं कि यह सदन उस विभेद को समझ पाएगा जिसे मैं स्पष्ट कर रहा हूं।

मैं बहस को सुनकर इस बात से प्रभावित हुआ कि अधिकांश माननीय सदस्यों ने जो कुछ भी कहा वह मुख्यतः मानवीय भावनाओं से प्रेरित था। मेरे विनम्र विचार से वे उस तथ्य से कहीं अलग हो गए है जिसे मैं यथार्थ कहूंगा। जब मैं इस चर्चा में भाग ले रहा हूं, तो मैं उसी बात का समर्थन करूंगा जिसे मैं स्थिति की वास्तविकता कहता हूं। मैं यह भी कहना चाहूंगा कि अनेक ऐसे मुद्दे चर्चा के दौरान सामने लाए गए हैं मानों वे ऐसे मुद्दे हों जिन पर सदन के निर्णय की आवश्यकता है। मैं विशेष रूप से यह कहना चाहूंगा कि कोयला खानों में इस समय चल रही मजदूरी के बारे में उल्लेख किया गया था। कोयला खानों में असंतोषजनक कल्याण परिस्थितियों के बारे में भी उल्लेख किया गया था और मैं अपने भाषण के दौरान इनके बारे में भी कुछ कहना चाहूंगा। परंतु मैं समझता हूं कि इस प्रस्ताव में उठाए गए मुद्दे की दृष्टि में ये केवल प्रासंगिक मामले हैं और ऐसे मामले नहीं हैं जिनके बारे में सदन को अपना निर्णय देने को कहा जाए।

* विधान सभा वाद-विवाद (केंद्रीय) खंड 1, 8 फरवरी, 1944, पृष्ठ 131