134 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
माननीय डॉ. वी. आर. अम्बेडकरः श्रीमन्, इस प्रकार, श्रमिकों का अभाव चल रहा था।
मुझे दो अन्य बातों का उल्लेख करना है जिन पर सदन को विचार करना आवश्यक है। पहली बात यह है कि सरकार इस मामले में ऐसे ही नहीं कूद पड़ी मानों यह कोई महत्वहीन बात है। मुझे सदन से यह कहना है कि सरकार ने बड़ी सावधानी से आगे कदम बढ़ाया है। सरकार की पहली विज्ञप्ति केवल मध्य प्रदेश पर ही लागू हुई थी, यह विज्ञप्ति समस्त कोयला क्षेत्र पर लागू नहीं की गई थी। नवम्बर के महीने में सरकार ने सोचा कि इसे बंगाल और बिहार में भी लागू करने की स्थिति आ गई है और दिसम्बर में सरकार ने इस विज्ञप्ति को उड़ीसा में भी लागू कर दिया। हमने इस बात पर भी ध्यान दिया है, और यह एक महत्वपूर्ण बात है, कि महिलाओं को पुरुषों के बराबर ही मजदूरी दी जाएगी। मैं समझता हूं कि पहली बार किसी उद्योग में लिंग के भेदभाव के बिना समान कार्य के लिए समान वेतन देने का सिद्धांत स्थापित किया गया है। हमने इस बात का भी ध्यान रखा है कि महिलाओं से 51/2 फीट से कम की गैलरी में काम नहीं कराया जाएगा। सदन को यह भी याद होगा कि वे विज्ञप्तियां अत्यंत अस्थायी प्रकार की हैं, और मैं इस बात पर बल देना चाहता हूं। हमने यह नहीं कहा कि वे विज्ञप्तियां युद्धकाल के दौरान चलती रहेंगी_ हमने इस मामले को नितांत लचीला रखा है_ हम ऐसी स्थिति में हैं कि किसी भी समय जब हम चाहें इनको निरस्त कर दें और हम यह कर सकते हैं। मुझे सदन से यह कहना चाहिए कि हम इसे विशुद्ध आपातकालीन और अस्थायी व्यवस्था मानते हैं। हम एक अन्य उपाय भी कर रहे हैं। जिससे इस विज्ञप्ति की अवधि कम हो जाए। उदाहरण् ार्थ, हम श्रमिकों का ऐसा शिविर लगा रहे हैं जहां हम पुरुष श्रमिकों की भर्ती करेंगे ताकि उन्हें कोयले की खानों में काम करने के लिए भेजा जा सके। हम एक और भी काम कर रहे है। जिससे इस अवधि को कम किया जा सके। हम श्रम आपूर्ति समितियों का गठन कर रहे हैं ताकि ऐसे ठेकेदार बन सके जो सैन्य कार्यों के लिए श्रमिक मुहैया करें और परिणामतः वहां से श्रमिक खानों के लिए श्रमिक आ जाएं।
माननीय अध्यक्ष (सर अब्दुर रहीम)ः माननीय सदस्य का समय पूरा हो गया है।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः श्रीमन्, यदि आप मुझे एक मिनट और देने की कृपा करें...............
माननीय अध्यक्ष (सर अब्दुर रहीम)ः मैं यह नहीं कर सकता। नियम का पालन तो अनिवार्यतः करना ही होगा।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः अतः सदन यह देखेगा कि यह विशुद्ध आपात कानून है और सरकार इस मामले की आवश्यकताओं से एक मिनट भी अधिक इस कानून को बनाए रखने का कोई इरादा नहीं रखती।