25. कोयला खान सुरक्षा (लदान) संशोधन विधेयक - Page 161

136 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

है जिसके अनुसार बोर्ड को स्वयं अपने द्वारा की जा रही लदान क्रियाओं पर धन खर्च करने का अधिकार हो। इसे एक बड़ी खामी समझा गया है। विशेषज्ञों की राय में यह जरूरी है कि बोर्ड को ऐसे अधिकार दिए जाएं। परिणामस्वरूप विधेयक के खंड 2 में यह प्रस्ताव किया गया है कि खंड 1 के उपखंड (3) की शब्दावली को बदल दिया जाए और बोर्ड को यह अनुमति हो कि वह लदान कार्य स्वयं कर सके और अपने नियंत्रण वाले धन को वह उन उद्देश्यों पर खर्च कर सके। विधेयक में दूसरा संशोधन

खंड 10 में प्रस्तावित किया गया है। कोयला खान सुरक्षा (लदान) अधिनियम की धारा 9 की उपधारा (3) के अनुसार खानों के मुख्य निरीक्षक को यह अनुमति है कि वह

खान मालिक या अभिकर्ता को आदेश दे सके और उनसे कह सके कि वे कोयले की रक्षा के लिए ऐसे सुरक्षात्मक उपाय करें जो खान की सुरक्षा के लिए आवश्यक हों। अधिनियम की धारा 10 इन आदेशों को अपीलीय बनाती है परंतु ऐसा अनुभव किया गया है कि कोयला खान विशेषज्ञों अथवा निरीक्षक के आदेश अपीलीय तो हैं परंतु अधिनियम में ऐसी व्यवस्था नहीं है जिससे खदान के स्वामी को यह अनुमति हो कि वह खदान निरीक्षक के आदेश के विरुद्ध कहीं अपील कर सके और परिपालन आदेश के विरुद्ध स्थगन आदेश प्राप्त कर सके। यह सुझाव दिया गया है कि यह एक दुर्भाग्यपूर्ण उपबंध है, और अपील करने का अधिकार दिया जाना चाहिए, परंतु मूल आदेश के परिपालन पर स्थगन आदेश की व्यवस्था नहीं होनी चाहिए। मौजूदा अधिनियम की धारा 10 में अतिरिक्त प्रावधान करके यह खामी दूर किए जाने का प्रावधान प्रस्तुत विधेयक की धारा 3 में किया गया है। अधिनियम में तीसरा प्रस्तावित संशोधन इस प्रश्न से संबद्ध है कि बोर्ड स्वयं लदान का कार्य करे या नहीं। लदान एक महत्वपूर्ण कार्य है। इसका उद्देश्य उस कोयले को बचाना है जिसके जल जाने की आशंका होती है। ऐसा पाया गया है कि कुछ ऐसी खानें हैं जो छोड़ दी गई हैं जिन पर किसी का नियंत्रण नहीं होता, और यह पता चलने पर कि कोयले में आग लग गई है अधिकांश लोग खान छोड़कर चले जाते हैं ऐसे भी मामले हैं जब कभी किसी

खान के स्वामित्व पर विवाद होता है अथवा किसी खान का स्वामी इस स्थिति में नहीं होता कि वह लदान व्यवस्था स्वयं चला सके। परिणामस्वरूप, ऐसा कोई व्यक्ति नहीं होता जिस पर लदान की जिम्मेदारी छोड़ी जा सके। ऐसी स्थिति से बचने के लिए यह समझा गया है कि बोर्ड को यह अधिकार दिया जाए कि वह स्वयं ही लदान का कार्य संभाल सके। संयोग से यदि बोर्ड को यह कार्य करना पड़े तो उसे उस स्थान पर जाने का अधिकार होना चाहिए जो किसी खान मालिक की संपत्ति है। इसी के लिए एक नई धारा 10क का प्रावधान किया गया है जिसके अनुसार बोर्ड को लदान के अधिकार दिए जा सकेंगे और वह किसी भी परिसर में दाखिल हो सकेगा।