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ऽश्रमिकों के प्रति सरकार की नीति
केन्द्रीय विधान सभा में भाषण
‘‘मैं समझता हूं कि मैं यह कह सकता हूं कि श्रमिकों को लेकर भारत सरकार के बारे में जो भी कहा जाए परंतु यह एक जायज दावा है कि श्रमिकों के संबंध में सरकार ने एक नया अध्याय खोला है।’’ भारत सरकार के श्रम सदस्य डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ने ये विचार 16 मार्च को केन्द्रीय विधान मंडल में श्रमिकों के प्रश्न पर श्रम विभाग की नीतियों पर श्री एन. एम. जोशी के कटौती प्रस्ताव पर बहस का जवाब देते हुए प्रकट किए। उन्होंने कहाः
श्री जोशी ने श्रमिक समस्याओं के विस्तृत क्षेत्र के इतने मुद्दे उठाए हैं कि मेरे लिए, श्रम विभाग का प्रतिनिधि होने के नाते, उनमें से प्रत्येक का विस्तार से उत्तर देना और उनमें ब्यौरेवार जाना संभव नहीं हो पाएगा। समयाभाव का ध्यान रखते हुए, मुझे कुछ ऐसे मुद्दों को उत्तर देने के लिए चुनना पड़ेगा जिन्हें मैं आवश्यक समझता हूं।
मजदूरों की दशा
श्री जोशी ने भारत में श्रमिकों की दशा संसार के अन्य देशों की तुलना में बहुत असंतोषजनक बताई है। श्रीमन मैं यहां खड़ा होकर यह नहीं कह सकता कि यह बात गलत है। निस्संदेह यह सत्य है। मैं तो इतना ही कहना चाहता हूं कि यदि स्थिति इतनी असंतोषजनक है जितनी श्री जोशी ने चित्रित की है तो इसका दायित्व भारत सरकार पर शायद नहीं डाला जा सकता।
श्रीमन, भारत में श्रमिकों की दशा आमतौर पर इस देश के औद्योगिक विकास पर निर्भर करती है जिस पर इस सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है और यदि उनकी दशा सचमुच असंतोषजनक है तो भारत सरकार पर दोष मढ़ने से कोई लाभ नहीं है। श्री जोशी ने कहा कि भारत सरकार का व्यवहार प्रकट करता है कि वह निष्क्रियता
ऽ इंडियन इनफोर्मेशन, 15 अप्रैल, 1944, पृष्ठ 410-13 (विधान सभा वाद-विवाद (केंद्रीय) खंड 2, 16
मार्च, 1944, पृष्ठ 1187-91)