140 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
और उपेक्षा की अपराधी है, कायर है, और उसने जो कुछ भी किया है वह अपर्याप्त है। मेरा कहना है कि अपना फैसला सुनाते समय श्री जोशी एक भेद नहीं कर सके तो बहुत आवश्यक हैं।
श्रमिकों की समस्याएं ऐसी भी हैं जिनके बारे में कोई विवाद नहीं है, जिनमें कोई आर्थिक प्रश्न नहीं उठते। मैं श्री जोशी से यह पूछना चाहता हूं कि क्या ऐसी किसी ऐसी श्रमिक समस्या पर भारत सरकार ने सभी आवश्यक और तत्काल कदम नहीं उठाए जिन पर विभिन्न संबंधित पक्षों के बीच विवाद नहीं था या जिनका वित्तीय प्रश्नों से संबंध नहीं था? मान्यवर, मुझे यह कहने में कोई संकोच नहीं है कि उन सभी मामलों में जहां पूर्ण सहमति थी या आम सहमति थी और जहां वित्तीय दायित्व वहन की बात नहीं थी, वहां सरकार ने पूरी तत्परता से जायज कार्रवाई की।
नवाबजादा मोहम्मद लियाकत अली खांः ऐसे मामलों में किसी कार्रवाई की दरकार ही नहीं थी।
डॉ. अम्बेडकरः बहुत सी कार्रवाई आवश्यक है।
युद्धकालीन उपाय
श्री जोशी ने यह भी कहा कि युद्ध के दौरान श्रमिकों की दशा बहुत गिरी क्योंकि सरकार ने कारखाना अधिनियम के अंतर्गत निर्धारित काम के घंटों के बारे में कई अपवाद लागू कर दिए और श्रमिक हड़ताल के लिए 15 दिन की पूर्व सूचना के उपबंध पर सीमा लगा दी जिससे श्रमिकों के हितों को गहरा आघात पहुंचा। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने ‘‘राष्ट्रीय श्रमिक सेवा अध्यादेश’’ और ‘‘तकनीकी कार्मिक अध्यादेश’’ जारी कर दिया जिसके अंतर्गत लोग ऐसे कार्य करने के लिए विवश कर दिए गए जो उनकी इच्छा के विपरीत हों। मुझे इस बात की खुशी है कि श्री जोशी ने ईमानदारी से स्वीकार किया है कि युद्ध के दौरान ऐसी सीमाएं लगाना न्यायसंगत है और मैं अपनी ओर से यही कह सकता हूं कि इन युद्ध उपायों के बारे में मेरे सामने जो भी शिकायत आई मैंने उन्हें दूर करने के लिए तत्काल कदम उठाए। मैं केवल एक मिसाल दूंगा। मुझे याद है कि श्री जोशी ने एक प्रश्न उठाया था कि अध्यादेश के तहत मालिकों को यह अधिकार दिया गया है कि वे मजदूरों पर मुकदमा ठोक सकते हैं जो श्रमिकों का उत्पीड़न है। मैंने इस बात को तुरंत स्वीकार कर लिया और मुझे याद है कि अध्यादेश में मैंने संशोधन किया और मालिकों से वह अधिकार छीन लिया और वह अधिकार सरकारी अभियोजन को सौंप दिया गया।
श्रीमन, जैसाकि मैंने कहा, मैं इन मामलों के संबंध में बहुत विस्तार से अपनी बात नहीं कहूंगा। परंतु मैं पूरी स्थिति का सार इन शब्दों में प्रस्तुत करूंगा कि जब