श्रमिकों के प्रति सरकार की नीति
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को विश्वास दिलाता हूं कि मैं खदानों में श्रमिकों की भरती बढ़ाने और कोयले का उत्पादन बढ़ाने के लिए हर संभव कदम उठा रहा हूं जिससे कि मैं इस स्थिति में आ सकूं कि जल्दी से जल्दी फिर प्रतिबंध लगा सकूं।
श्रीमती के. राधाबाई सुब्बारायनः क्या मैं माननीय सदस्य से एक प्रश्न पूछ सकती हूं? क्या सरकार ने खानों के भीतर महिलाओं को काम दिए जाने के बारे में अध्यादेश जारी किए जाने से पूर्व त्रिपक्षीय सम्मेलन से मशविरा कर लिया था?
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः मुझे खेद है कि इसके लिए हमें समय नहीं मिला। जैसाकि मैंने कहा, यह एक तात्कालिक मामला था और हमें इस पर तुरंत उपाय करने पड़े।
उन्होंने एक मुद्दा यह उठाया खासतौर से यह बात कि भारत सरकार श्रमिकों की समस्याएं हल करने के बजाय श्रमिक नेताओं को जेल भेज रही है। श्रीमन्, यह विषय मेरे विभाग से संबंधित नहीं है। कल मैंने बहस के दौरान काफी कुछ बताया था। न तो कल और न आज ही किसी विशेष मामले को स्पष्ट किया गया है कि सरकार ने किस श्रमिक नेता को गिफतार किया है।
सेठ यूसुफ अब्दुला हारूनः मैंने अभी कराची पोर्ट ट्रस्ट के मामले में उल्लेख किया था।
श्री हुसैनभाई ए. लालजीः क्या पोर्ट ट्रस्ट आपके अधीन है?
डॉ. अम्बेडकरः नहीं,
श्री लालजीः रेल कर्मचारी?
डॉ. अम्बेडकरः नहीं।
श्री लाल जीः नाविक?
डॉ. अम्बेडकरः नहीं?
श्री लाल जीः तब आपके अधीन क्या है?
डॉ. अम्बेडकरः श्रमिकों की और बहुत सी श्रेणियां मेरे विभाग के पास हैं। मैं श्रमिक नेताओं को जेल भेजे जाने की बात पर बोल रहा था।
श्रीमती के. राधाबाई सुब्बारायनः क्या श्री डांगे को जेल नहीं भेजा गया?
डॉ. अम्बेडकरः मैं उस पर आ रहा हूं। जैसाकि मैं श्रमिक नेताओं को समझ चुका हूं, श्रमिक नेता एक से अधिक भूमिकाएं निभाते हैं।