26. श्रमिकों के प्रति सकरार की नीति - Page 171

146 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

वे कभी तो श्रमिक नेता होते हैं, कभी वे साम्यवादी हैं, कभी वे राष्ट्रवादी नेता हैं, कभी वे कांग्रेस के सदस्य हैं, कभी वे महासभाई हैं या किसी अन्य संगठन से संबद्ध होते हैं।

एक माननीय सदस्यः सब पर बंदिश है?

डॉ. अम्बेडकरः यह कहना बहुत कठिन है कि जो श्रमिक नेता विविध भूमिकाएं निभाते हैं उन्हें मात्र इसलिए जेल भेजा गया कि वे श्रमिक नेता हैं, इसलिए नहीं कि उन्होंने कुछ अन्य भूमिका निभाई - साम्यवादी की, कांग्रेसी की या हिंदू महासभा के सदस्य की। दरअसल मैं विनम्रतापूर्वक अपने निष्कर्ष के आधार पर कह सकता हूं कि यदि श्रमिक नेता पूरी तरह श्रमिकों के लिए ही समर्पित होते और अन्य प्रकार के राजनीतिज्ञों के हाथों में न खेलते होते या अन्य कार्यक्रम न चलाते तो वे अपने आपको न सिर्फ नियम 26 के दायरे से मुक्त रख पाते, बल्कि वे श्रमिकों की महान सेवा कर सकते थे। दुर्भाग्य से इस देश में ऐसे श्रमिक नेता नहीं हैं जो सिर्फ श्रमिकों के प्रति समर्पित हों।

एक माननीय सदस्यः श्री जोशी हैं।

डॉ. अम्बेडकरः मैं नहीं जानता कि इस सदन में बहस के दौरान ऐसा कोई अन्य मुद्दा उठाया गया है जिसका उत्तर नहीं दिया गया या जिसके उत्तर की आवश्यकता है।

मैं समझता हूं कि मैं यह कह सकता हूं कि श्रमिकों के संबंध में भारत सरकार के लिए चाहे जो कुछ कहा गया हो, यह जायज दावा किया जा सकता है कि श्रमिकों के प्रति सरकार के रवैये में एक नया आयाम उभर कर आया है।

श्री अमरेन्द्रनाथ चट्टोपाध्यायः इसके पीछे नीति क्या है?

डॉ. अम्बेडकरः पिछले आधे घंटे से मैं यही तो बता रहा हूं।

मौलवी अब्दुल गनीः क्या मैं माननीय सदस्य से एक छोटी सी सूचना प्राप्त कर सकता हूं? यह क्या कारण है कि एक केंंद्र से प्रशिक्षण पाने के बावजूद तकनीशियनों को प्रमाणपत्र नहीं दिए गए हैं?

डॉ. अम्बेडकरः मैं इस मामले को देखूंगा।

श्री एन. एम. जोशीः मान्यवर, यह आशा करते हुए कि इस बहस के बाद श्रम विभाग की गतिवधियां बढ़ जाएंगी, मैं निवेदन करता हूं कि मुझे मेरा प्रस्ताव वापस लेने की अनुमति दी जाए।

सभा की अनुमति से कटौती प्रस्ताव वापस लिया गया।

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