श्रमिकों के प्रति सरकार की नीति
ऽफिलाडेल्फिया में अंतर्राष्ट्रीय श्रम सम्मेलन
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24 मार्च को जारी सरकारी विज्ञप्ति में कहा गया कि भारत सरकार ने 20 अप्रैल, 1944 को अमेरिका के फिलाडेल्फिया में आयोजित श्रम सम्मेलन के लिए निम्नलिखित प्रतिनिधियों को मनोनीत किया हैः
सरकारी प्रतिनिधिः भारत के उच्चायुक्त सर मैनुअल रुंगनाधन, नेता, श्रम विभाग के सचिव, श्री एच. सी. प्रायर, प्रतिनिधि, उच्चायुक्त कार्यालय का एक सदस्य, भारतीय प्रतिनिधियों का सलाहकार और भारतीय शिष्टमंडल का सचिव।
नियोक्ताओं के प्रतिनिधिः श्री जे. सी. महिन्द्रा, प्रतिनिधि, श्री डी. जी. मुल्हेरकर, सलाहकार।
श्रमिकों के प्रतिनिधिः श्री जमनादास मेहता, प्रतिनिधि, श्री आफताब अली, सलाहकार, श्री आर. आर. भोले, सलाहकार।
भारत ने अंतर्राष्ट्रीय संगठन के सदस्य की हैसियत से, ऐसे संगठनों की सहमति से जो अपने-अपने देशों के नियोक्ताओं और श्रमिकों का सर्वाधिक प्रतिनिधित्व करते हैं, गैर-सरकारी प्रतिनिधियों तथा सलाहकारों को मनोनीत किया है। नियोक्ताओं के प्रतिनिधि, सर्वमान्य प्राप्त सिफारिशों के अनुसार, इस पद्धति से चयन किए गए हैं।
जहां तक श्रमिकों का संबंध है, उनके दो मुख्य संगठन हैं और उनसे कोई सहमत प्रस्ताव प्राप्त नहीं हुआ। सरकार के पास कोई ऐसा साधन नहीं है जिससे पता लगाया जा सके कि इन दोनों संगठनों में से किसका आधार अधिक व्यापक है। परंतु सरकार की इच्छा है कि श्रमिकों को इस सम्मेलन में अपनी बात कहने का अवसर दिया जाए। इसलिए सहमति में विफल हो जाने पर भी सरकार ने फिलहाल यह नीति अपनाई है कि दोनों संगठन आपसी सहमति से बारी-बारी से अपने प्रतिनिधि मनोनीत करें।
इस फैसले के अधीन इंडियन फेडरेशन ऑफ लेबर की सिफारिश पर वहां से एक प्रतिनिधि और एक सलाहकार श्रमिकों के प्रतिनिधियों के रूप में मनोनीत किए गए हैं, और आल इंडिया म्युनिसिपल एम्पलाईज़ फेडरेशन की सिफारिश पर श्री आर. आर. भोले को मनोनीत किया गया है जिन्हें कर्मचारियों के प्रतिनिधि ने सह-सलाहकार के रूप में स्वीकार किया है।
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ऽ इंडियन इनफोर्मेशन, 15 अप्रैल, 1944, पृष्ठ 416