विविध विभाग
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बंगाल और असम में चल रहा है जो सैनिक गतिविधि क्षेत्र से सटे हुए हैं। सरकार का दूसरा काम ‘‘श्रम डिपो’’ की स्थापना है इनमें से एक डिपो गोरखपुर में स्थापित किया गया है। अधिकांश अकुशल श्रमिकों को एकत्र किया जाता है। फिर उनकी श्रेणियां बनाई जाती हैं और उन्हें योग्यतानुसार कोयला खानों या सैनिक कार्यों के लिए भेज दिया जाता है। यह खर्च ‘‘एम’’ - अकुशल मजदूरों की समन्वय योजना में दिखाया गया है। दरअसल यह राशि इन दोनों योजनाओं के लिए है जिनका मैंने जिक्र किया है। बस मुझे इतना ही कहना है।
श्री एन. एम. जोशी (मनोनीत गैर-सरकारी)ः श्रीमन्, माननीय सदस्य ने हमें अपने दो कार्यक्रमों से अवगत कराया है। एक है श्रम आपूर्ति समिति और दूसरा है श्रम डिपो की स्थापना जहां से उन्हें विभिन्न उद्देश्यों से दूसरे स्थानों पर भेजा जा सके। श्रीमन्, जहां तक उनकी श्रम आपूर्ति समिति का प्रश्न है, मैं माननीय सदस्य से पूछना चाहता हूं कि जब ये समितियां बनाई गई थीं तो क्या उनमें कोई श्रमिक प्रतिनिधि शामिल किया गया था।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः मैं केवल इतना बताना चाहता हूं कि मैंने कल ही आदेश जारी किए हैं कि इन श्रम आपूर्ति समितियों मेंं श्रमिकों को प्रतिनिधित्व दिया जाए।