डॉ. बी. आर. अम्बेडकर-जीवन-झाँकी - Page 18

डा. बी. आर. अम्बेडकर जीवन-झॉकी 15

प्रारंभिक शिक्षा

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यदि 1892 में सेना में महारों की भर्ती पर रोक न लगाई होती तो इस बात की बहुत संभावना थी कि सूबेदार के बेटे ने भी सैनिक वृत्ति को ही अपनाया होता, किन्तु घटना-चक्र इसके विपरीत घटा। शिक्षा के महत्व को महसूस करते हुए सूबेदार ने अपने पुत्रों को शिक्षित करने की पूरी कोशिश की परंतु इसके लिए बड़ा प्रयास करना पड़ा। विद्यालयों ने महार के बच्चों को प्रवेश देने से इंकार कर दिया। वह अपने गृह-नगर रत्नागिरी से सतारा चले गए और बाद में मुंबई चले गए जहां अंततः बस गए। एक स्थिति तो यह आ गई कि उन्हें यह भी निर्णय लेना पड़ा कि अपने दो बेटों में से विद्यालय में किसकी पढ़ाई का खर्च उठाएं और उन्होंने छोटे बेटे को पढ़ाने का निर्णय लिया जो अब दलित वर्ग का नेता है।

इस युवक को अल्पायु में ही यह पता चल गया कि अछूत होना कितनी बुरी बात है। उसका जन्म वर्ष 1893ऽ में महू में सैनिक छावनी में प्रजातांत्रिक वातावरण में हुआ किंतु बचपन में ही उसे बाम्बे प्रेसिडेंसी जाना पड़ा। उसे सतारा में अपने पाठशाला के दिन याद हैं जब वह बोरी का एक टुकड़ा लेकर जाता और कक्षा के एक कोने में दुबक कर बैठ जाता। पाठशाला का नौकर भी उस टाट को नहीं छूता था जिसे बालक अम्बेडकर प्रतिदिन अपने साथ लेकर पाठशाला जाता और वापस लाता था। वह पाठशाला के नल को भी नहीं छू सकता था और वह तभी पानी पी सकता था जब पाठशाला का चपरासी वहां नल खोलने के लिए मौजूद रहता। घर पर उसकी बहनें कह कपड़े धोती थी क्योंकि कोई भी धोबी उनके कपड़े नहीं धोता था और वे ही अपने भाई के बाल भी काटती थी।

उनके मानस-पटल पर एक घटना आज भी बहुत स्पष्ट रूप से अंकित है। एक बार वह अपने दो बड़े भाइयों और एक छोटे भतीजे के साथ अपने पिता से मिलने के लिए एक कस्बे के लिए चल पड़े जो रेलवे स्टेशन से दूर था। कोई गाड़ीवान उन्हें यात्रा के अंतिम चरण में ले जाने को तैयार नहीं हुआ। अंततः उन्हें दुगना भाड़ा भी चुकाना पड़ा और बैलगाड़ी भी स्वयं हांकनी पड़ी। रास्ते में भूख मिटाने के लिए जो

खाना बनाकर दिया गया था वह खराब हो गया क्योंकि उनके पास पीने का पानी नहीं था और रास्ते में पीने को कोई भी उन्हें पानी नहीं देता।

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समय बीतता गया बी. आर. अम्बेडकर ने विद्यालय की शिक्षा पूरी की और बंबई में

ऽ डॉ. अम्बेडकर के जीवनी-लेखकों के अनुसार, सतारा के विद्यालय में पंजीकरण के अनुसार, जहां

उन्होंने प्राथमिक शिक्षा ग्रहण की थी, उनकी जन्म-तिथि 14 अप्रैल, 1891 है - संपादक