16 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
ऐलफिंस्टोन कालेज में प्रवेश लिया। अभी विश्वविद्यालय की शिक्षा अधूरी ही थी कि इनके पिता के पास धनाभाव हो गया और एक मित्र इस युवा स्नातक विद्यार्थी को बड़ौदा के गायकवाड़ के पास ले गए। गायकवाड़ द्वारा दी गई छात्रवृत्ति के सहारे वह अपनी स्नातक उपाधि प्राप्त कर सके।
स्नातक होकर जब बी. आर. अम्बेडकर गायकवाड़ महोदय को धन्यवाद देने गए तो उनके आश्चर्य का ठिकाना न रहा जब उनसे पूछा गया कि क्या आगे अध्ययन के लिए वह विदेश जाना चाहते हैं। इस प्रस्ताव को सुनकर वह खुशी से उछल पड़े और न्यूयार्क के कोलम्बिया विश्वविद्यालय में उनके प्रवेश की व्यवस्था की गई। अमेरिका की समुद्र यात्रा के लिए रवाना होने से पूर्व प्रतीक्षा काल के दौरान के लिए गायकवाड़ ने उन्हें सुझाव दिया कि अपने पूर्वजों की परंपरागत वृत्ति में प्रवेश करें और उन्हें बड़ौदा की राजकीय सेना में लेफ्टीनेंट का पद दिया। कोलम्बिया विश्वविद्यालय में उन्होंने अर्थशास्त्र, समाजविज्ञान, राजनीति और नैतिक दर्शनशास्त्र का अध्ययन करते हुए स्नातकोत्तर होकर पी.एच.डी. उपाधि प्राप्त की। वर्ष 1971 में वे लंदन गए और इंडिया लाइब्रेरी तथा लंदन स्कूल आफ इकोनामिक्स में अनुसंधान कार्य आरंभ करने के साथ-साथ ग्रेज-इन में भी प्रवेश लिया। भारत लौट कर उन्होंने अपनी सेवाएं उस व्यक्ति को अर्पित की जिसने उनकी मदद की थी और उन्हें बड़ौदा के एकाउंटेंट जनरल के कार्यालय में प्रोबेशनर (परिविद्यार्थी) के रूप में नियुक्त किया गया। बड़ौदा में अनुभव
डॉ. अम्बेडकर कई वर्षों तक विदेश में रहे और बहुत से मित्र बनाए जिनमें भारतीय, अमेरिकी और यूरोपीय थे। उन लोगों ने उन्हें कभी भी अछूत नहीं समझा। इस प्रकार उनके मन से यह भावना बहुत कुछ समाप्त हो गई कि वे दलित वर्ग के हैं। अब जब उन्होंने बड़ौदा पहुंच कर कार्य आरंभ किया तो वह सभी बातें काटें की भांति पुनः चुभने लगीं। वह एक महार कहां ठहरे? उन्होंने एक पारसी सराय वाले को इस बात के लिए राजी कर लिया कि वह उन्हें रहने और खाने की सुविधा दे दे। सौभाग्य से वहां कोई और ठहरने वाला नहीं था, किन्तु दस दिन बाद एक बड़ी संख्या में पारसी लोग हाथ में लाठी लिए आए और उन्हें बुलाया और पूछा कि उनके समुदाय के लिए आरक्षित होस्टल को भ्रष्ट करने का उनका क्या मतलब है और कहा कि उसी शाम तक होस्टल खाली कर दें।
उन्होंने दो मित्रों से आश्रय मांगा जिनमें से एक हिंदू था दूसरा ईसाई। उनमें से पहले ने कहा, ‘‘यदि तुम मेरे घर आओगे तो मेरे नौकर छोड़ जाएंगे।’’ दूसरा मित्र अपनी पत्नी से परामर्श करना चाहता था। डॉ. अम्बेडकर यह जानते थे कि वे पति पत्नी