30. कोयला खान कल्याण कोष संबंधी परामर्श समिति - Page 184

कोयला खान कल्याण कोष संबंधी परामर्श समिति

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दो भाग होंगे - प्रशासनिक योजनाएं जिसमें अध्यक्ष द्वारा नियुक्त सचिवालय कर्मचारियों पर होने वाले खर्च और वेतन आदि शामिल होंगे और कल्याण कार्यक्रम जो या तो अनिवार्य होंगे अथवा वैकल्पिक।

केन्द्र सरकार द्वारा अनुमोदित योजनाओं के लिए कोयला खान मजदूर कल्याण कोष द्वारा दी जाने वाली वित्तीय सहायता के संबंध में प्रांतीय सरकारों, स्थानीय निकायों, खान मालिकों या अभिकर्ताओं या प्रबंधकों पर केंद्र को कुछ शर्तें लगाने के अधिकार इन नियमों में दिए गए हैं। इन शर्तों से यह सुनिश्चित होगा कि जिन कार्यों के लिए धन स्वीकार किया गया है उन्हें समुचित ढंग से और शीघ्र पूरा किया जाए, निरीक्षण के लिए सभी सुविधाएं दी जाएं और स्वीकृत राशि का सही लेखा-जोखा रखा जाए।

किसी स्थानीय निकाय अथवा कार्यकारी अभिकर्ता या कोयला खदान के प्रबंधक को इन शर्तों की पूर्ति के लिए एक करारनामे पर हस्ताक्षर करने होंगे।

समिति ने इस बात पर भी विचार किया कि झरिया और आसनसोल स्वास्थ्य बोर्डों तथा झरिया जल बोर्ड का कोष के अनुदान के कार्यकारी निकाय के रूप में कहां तक उपयोग किया जाना चाहिए। यह विचार प्रकट किया गया कि कोयला खानों में मौजूदा निकायों के कोष से प्राप्त राशि से कल्याण कार्यों और अन्य योजनाओं के संचालन के लिए उपयोग किया जाए। समिति ने अध्यक्ष के उस सुझाव को स्वीकार कर लिया कि परामर्श समिति हर मामले में अलग से फैसला करे कि अनुदान स्थानीय निकायों को दिया जाए या नहीं। समिति ने इस बात पर भी विचार किया कि तुरंत कितना धन खर्च किया जाना है जिसे कल्याण कोष से लिया जाए। इस उद्देश्य से, जिन मदों का सुझाव दिया गया वे इस प्रकार हैंः कल्याण अधिकारियों पर होने वाला खर्च, नियुक्त किए जाने वाले सचिवालय कर्मचारियों पर खर्च, मध्य प्रांत और बरार की खानों में पहले ही चलाए जा रहे मलेरिया निवारण कार्यक्रमों पर खर्च, और बंगाल-बिहार के लिए स्वीकृत कर लिए जाने पर होने वाला खर्च। समिति ने अध्यादेश द्वारा लगाए जाने वाले उपकर पर भी विचार किया।