अभ्रक उद्योग को सुदृढ़ और स्थिर बनाया जाएगा
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जा सकता है जिसके परिणामस्वरूप कि उद्योगों में इसकी खपत कम हो जाए, और यह किस सीमा तक हो सकता है, तैयार माल बनाने के लिए देश में ही अभ्रक के उपयोग में वृद्धि, गवेषणा और विकास, अनुकूल व्यवस्था तंत्र स्थापित करने की आवश्यकता ताकि या तो कोई केंद्रीय अभ्रक समिति बनाकर अन्यथा किसी और तरह से अभ्रक व्यापार और उद्योग के हितों का ध्यान रखा जा सके।
डॉ. अम्बेडकर ने कहा कि जांच समिति का एक पूर्णकालिक अध्यक्ष होगा और दो अंशकालकि सदस्य होंगे - एक देसी व्यापार का अनुभवी होगा और दूसरा निर्यात व्यापार का - और एक पूर्णकालिक सचिव होगा। इसमें सात आगणक होंगे - दो बिहार सरकार के, दो बिहार के व्यापारियों के, एक-एक मद्रास और राजपूताना के अभ्रक व्यापार का, और एक अभ्रक मजदूरों का। इसके अतिरिक्त, समिति की सहायता के लिए दो तकनीकी सलाहकार होंगे जिनमें एक भारतीय भूगर्भ सर्वेक्षण का निदेशक होगा और दूसरा वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान बोर्ड का प्रतिनिधि होगा।
श्रम कल्याण
श्रम और उद्योग के प्रश्न पर श्रम सदस्य ने इस बात पर बल दिया कि यदि सरकार उद्योगों की सहायता करना चाहती है तो वह उद्योगों को श्रमिकों का शोषण नहीं करने देगी। यह कहा जाता है कि भारत का इस क्षेत्र में एकाधिकार सस्ते श्रम के कारण है। यदि यह सच है तो न तो यह उद्योगों को शाबाशी देने वाली बात है और न ही श्रमिकों के हित में है। यदि सरकार इस उद्योग की स्थिरता के लिए आगे आती है, तो यह भी आशा की जाएगी कि उद्योग श्रमिकों के हितों की रक्षा करे।
श्रम सदस्य ने विचार प्रकट किया कि सरकार चाहेगी कि श्रमिकों को जीवन-यापन योग्य वेतन मिले, रोजगार की अच्छी शर्तें और सामान्य कल्याण सुविधाएं हों जिससे श्रम कल्याण को जारी रखा जा सके। उन्होंने सरकार की सामान्य नीति का जिक्र किया कि उद्योगों से धन एकत्र किया जाएगा और उदाहरण के रूप में कोयले पर लगे उपकर की ओर संकेत किया। उनका कहना था कि उद्योगों को, विशेष उपकर के रूप में, कल्याण कार्यों का खर्च उठाना चाहिए।
इससे पहले अपने भाषण में श्रम सदस्य ने भारतीय अभ्रक के महत्व पर बल देते हुए बताया कि बिजली तकनीकी उद्योगों का अस्तित्व अभ्रक पर टिका है। और अभ्रक एक सामरिक महत्व का पदार्थ है जिसके बिना देश की सुरक्षा असंभव होगी। अभ्रक चादर का विश्व उत्पादन 1913 में 17018 मीट्रिक टन था जिसमें से 14598 मीट्रिक टन भारत का था अर्थात 81.7 प्रतिशत। भारत के औद्योगिक मामलों में अभ्रक की भूमिका अद्वितीय है।