162 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
उन्होंने कहा ‘‘हम कपास के व्यापार के विषय में काफी कुछ सुनते हैं। वस्त्र और जूट उद्योगों की बात होती है, परंतु भारत के अभ्रक उद्योग का जिक्र भूले-भटके ही होता है इसका कारण बताते हुए डाक्टर अम्बेडकर ने बताया कि इसके दो कारण हैं-पहला यह कि अभ्रक का प्रयोग भारत में नहीं होता, इसका निर्यात ही होता है। इसलिए भारत के लोगों को इससे कोई लेना-देना नहीं। लाभ की राशि विदेशों से आती है और खपत वाले देशों को भारत में कोई रुचि नहीं। दूसरा कारण है उद्योग की बेकार और असंगठित स्थिति। उन्होंने उत्पादन के आंकड़े देते हुए बताया कि 1905 में हमारा उत्पादन 1714 मीट्रिक टन था। 1937 में वह 14598 हो गया। उद्योग की असाधारण वृद्धि का एक और लक्षण है कि सूखे मौसम में खदानों और फैक्ट्रियों में 60,000 श्रमिक भर्ती किए जाते हैं और 100,000 घरों में परतें निकालने का काम करते हैं। अपने इतने विस्तार के बावजूद, मिल मालिकों के संघ की तुलना में या उत्तर भारतीय प्रबंधक संघ की तुलना में अभ्रक उद्योग का कोई बड़ा संगठन नहीं है।
चोरी
इस स्थिति के कारण बताते हुए उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र के लोग आपसी द्वेष और व्यापारिक तोड़-जोड़ में लगे रहते हैं। हर व्यक्ति दूसरे को पीछे धकेल कर अपना स्थान बनाना चाहता है। यह सहयोग के स्थान पर खींचातानी का क्षेत्र बना हुआ है। उद्योग के भविष्य का जिक्र करते हुए श्रम सदस्य ने कहा कि भारत सरकार इस उद्योग को दृढ़ता और स्थिरता प्रदान करने की हर संभव कोशिश करेगी। सरकार को पता है कि इस उद्योग के सामने दो समस्याएं हैं - एक तो तात्कालिक समस्या है और दूसरी अंतिम जिसके लिए दीर्घकालिक उपायों की आवश्यकता है। तात्कालिक समस्या अभ्रक की चोरी की है। आमतौर से तो भारत सरकार इसे चोरी की मामूली घटना समझ लेती और चुराई गई अभ्रक लौटाए जाने पर चुप हो जाती, परंतु अभ्रक के महत्व को देखते हुए सरकार ने उद्योग की सहायता की ओर तत्परता से ध्यान दिया। अभ्रक विकास आदेश लागू किया गया। इसमें कोई दोष भी हों तो भी जहां कहीं सरकारी तंत्र का उपयोग किया गया है वहां चोरी की घटनाएं कम हुई हैं। उन्होंने तर्क दिया कि जो लोग इस उद्योग में लगे हैं उन्हें सहयोग करना चाहिए और आश्वासन दिया कि सरकार चोरी रोकने की दिशा में कदम उठाने के लिए तैयार है।
प्रस्ताव का स्वागत
जांच समिति नियुक्त किए जाने के प्रस्ताव का सम्मेलन में उद्योग के प्रतिनिधियों ने सर्वसम्मति से स्वागत किया। यह भी सुझाव दिया गया कि समिति, अभ्रक उद्योग के युद्धोपरांत पुनर्निर्माण के प्रश्न पर भी विचार करे।