अभ्रक उद्योग को सुदृढ़ और स्थिर बनाया जाएगा
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इससे पूर्व, सम्मेलन में उद्योग की तात्कालिक आवश्यकताएं पूरी करने के उपायों पर भी विचार किया गया। इनमें अभ्रक की कुछ किस्मों की खरीद और बिक्री तथा हस्तांतरण पर प्रतिबंध लगाना, जिलाधीशों और प्रांतीय सरकारों को प्रमाणपत्र देने के लिए कुछ विवेकाधीन अधिकार प्रदान करना, लाइसेंसशुदा अभिकर्ताओं की बाढ़ को रोकना, अभ्रक भंडारण के भंडारग्रहों की स्थिति पर नियंत्रण रखना, और प्रशासन तंत्र में सुधार करना शामिल है।
यह भी संकेत दिया गया कि केंद्र सरकार का इरादा अभ्रक नियंत्रक आदेश, 1940 में इस उद्देश्य से जल्द ही संशोधन करने का है।
अभ्रक उद्योग के श्रमिकों के कल्याण के लिए मौजूदा खाद्यान्न रियायतों, मंहगाई भत्तों, आवास स्थिति, जल आपूर्ति, चिकित्सा सुविधाओं और वेतनों की समीक्षा की गई। श्रम सदस्य ने यह जानकारी प्राप्त की कि क्या अभ्रक मजदूरों के लिए कोई मूल वेतन निर्धारित है और इस बात पर बल दिया कि चिकित्सा की ओर ध्यान दिए जाने, आवास सुविधाएं जुटाने और जल आपूर्ति की आवश्यकता है। यह बताया गया कि अधिकांश श्रमिक अपने गांवों में रखते हैं। इस बात पर आमतौर पर सहमति नजर आई कि अभ्रक श्रमिकों के हित में कल्याण और विकास उपकर लगाया जाए। इस बात पर सहमति थी कि भारतीय भूगर्भ सर्वेक्षण पर यह दायित्व हो कि वह अभ्रक उद्योग को कोयले का वितरण करे।
श्रम सदस्य का अभ्रक खानों का दौरा
29 अप्रैल को डॉक्टर अम्बेडकर, श्री मजूमदार, डॉ. क्लैग और श्री क्रासफील्ड के साथ अभ्रक फैक्ट्री की खादान देखने गए। यह दल सीढि़यों से उतर कर 400 फुट नीच गया। खनन के विभिन्न पहुलओं के साथ श्रम सदस्य ने ड्रिलिंग और बोरिंग कार्य भी देखा जो लैंडलीज कम्प्रेसर्स द्वारा तैयार न्यूमैटिक ड्रिल से किया जा रहा था-सरकार ने अभ्रक उत्पादन बढ़ाने के लिए यह सुविधा इस उद्योग को मुहैया कराई है। धरातल पर लौटने पर श्रम सदस्य ने श्रमिकों की झोंपडि़यां देखीं। उसके बीच में केसरिया रंग का एक तिकोना पत्थर एक वृक्ष के नीचे रखा हुआ था। श्रम सदस्य को बताया गया कि श्रमिक इन पत्थरों को अभ्रक देवी के रूप में पूजते हैं।
कोडरमा फैक्ट्री में हजारों स्त्री-पुरुष श्रमिक विशाल शयनागार में बैठे अभ्रक के ब्लाकों में काम कर रहे थे। वहां दल के अभ्रक निर्माण की प्रक्रिया देखी जैसेः अभ्रक की स्लेटिंग, नाइफ ड्रेसिंक, सिंक ड्रेसिंग, और दक्ष हाथों से विखंडन। फैक्ट्री के एक अनुभाग में श्रमिक अभ्रक को अलग करके समान आकार की बारीक परत बना रहे थे जो विमानों के स्पार्क प्लगों में इस्तेमाल होता है। एक अन्य अनुभाग में