164 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
श्रम सदस्य ने देखा वे लोग अभ्रक के बड़े टुकड़े से छोटी-छोटी परतें निकाल रहे थे जिनसे माइकानाइट तैयार होता है।
विज्ञान ने अभ्रक का महत्व बढ़ा दिया है
भारत संसार भर में अभ्रक की परतें तैयार करने वाला अग्रणी देश है जिसका
खनन मुख्य रूप से बिहार के हजारी बाग और गया जिलों की खदानों और मद्रास के नैल्लौर तथा कुछ हद तक मद्रास के अन्य जिलों और राजस्थान के अजमेर-मेरवाड़ तथा टोंक में होता है। इसका 80 प्रतिशत उत्पादन बिहार से आता है और बाकी अधिकतर नैल्लौर से।
अभ्रक किसी पुस्तक के विशाल पृष्ठों के समान होती है जो 10 फुट परिधि के होते हैं। फिर अभ्रक की परत वाली चट्टानों को छील-छील कर अलग-अलग परतें निकाली जाती हैं। शुभ्र अभ्रक में फेल्सपर और बिल्लौर तथा अन्य खनिजों का मिश्रण होता है जैसे बेराइल जो अजमेर से बेरीलियम अयस्क के रूप में निर्यात किया जाता है।
भारत अभ्रक का निर्यात मुख्य रूप से ब्रिटेन और अमरीका को करता है।
विज्ञान की प्रगति से इस प्राकृतिक पदार्थ का महत्व घटा नहीं है, बल्कि बढ़ गया है। जेनरेटरों का तापमान बढ़ाया जाना हो, रेडियो और टेलीविजन का विकास करना हो, कारों, विमानों की संख्या बढ़ानी हो अथवा इलैक्ट्रान नियंत्रित करना हो, तो अभ्रक का महत्व बढ़ता ही जाएगा।
निम्नांकित उपकरणों का कार्य बिना अभ्रक के नहीं चल सकताः-
(1) मोटरों और जेनरेटरों के कम्युटेटर भाग
(2) मोटरों और जनरेटरों के कम्युटेटर वी रिंग।
(3) आरमेचर्स (उच्च तापमान और उच्च वोल्टेज)
(4) विमानों के मोटर स्पार्क प्लग।
(5) रेडियो ट्यूब।
(6) ट्रांसफार्मर।
(7) रेडियो कंडेंसर।