32. स्थायी श्रम समिति में मजदूर संघों की मान्यता पर विचार - Page 190

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ऽस्थायी श्रम समिति में मजदूर संघों की

मान्यता पर विचार

27 जून को नई दिल्ली में आयोजित स्थायी श्रम समिति की पांचवीं बैठक में मजदूर संघों की मान्यता अनिवार्य करने और भारतीय मजदूर संघ (संशोधन) विधेयक, 1943 में वर्णित मान्यता बोर्डों की नियुक्ति और गठन पर विचार किया गया। बैठक की अध्यक्षता भारत सरकार के श्रम सदस्य, डॉ. बी. आर अम्बेडकर ने की।

प्रबंधकों और श्रमिकों के प्रतिनिधियों ने मजदूर संघों की प्रतिनिधित्व प्रणाली निश्चित करने के लिए मानकों पर अपने विचारों का स्पष्टीकरण किया।

एक ओर प्रबंधकों के प्रतिनिधियों ने मजदूरों के इस विचार का समर्थन किया कि प्रबंधकों और श्रमिकों को मिल कर बैठना चाहिए, दूसरी ओर वे चाहते हैं कि यह सहयोग स्वैच्छिक हो और उसमें कानून का हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए। यह कहा गया कि मजदूर संघों के स्वस्थ विकास से उनकी मान्यता के विषय में कठिनाई नहीं होगी। कर्मचारियों का कहना था कि मान्यता को अनिवार्य बनाया जाए और साथ ही यह भी दलील दी कि संशोधन विधेयक की परिधि बढ़ाई जाए ताकि मजदूर संघों को और अधिक अधिकार और सुविधाएं प्राप्त हो सकें।

श्रम विवादों के आंकड़े

फिर समिति में श्रम विवादों के मौजूदा आंकड़ों में सुधार के प्रस्ताव पर विचार किया गया ताकि आंकड़ों के संयोजन की प्रणाली में एकरूपता आ सके और ये भारत के प्रांतों तथा अन्य देशों के बीच तुलना में उपयोगी सिद्ध हो सकें। यह सुझाव दिया गया कि प्रांतीय सरकारों को औद्योगिक सांख्यिकी अधिनियम, 1942 में आंकड़े संग्रह करने का जो अधिकार दिया गया है उसका उपयोग किया जाए। साथ ही यह प्रक्रिया अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठनों की प्रणाली के अनुरूप होनी चाहिए।

ऽ इंडियन इनफोर्मेशन, 15 जुलाई, 1944, पृष्ठ 53-57