170 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
इसके कई कारण हैं, जिनमें से दो प्रमुख हैं। पहला यह कि सेना में मांग घट गई है, और दूसरा है छोटे केंद्रों पर आने वाला भारी खर्च।
सरकार के इरादे
सरकार के इस कदम से पता चलता है कि ये उपाय आवश्यक समायोजन के लिए किए गए हैं जो समय और स्थिति के अनुरूप हैं। इससे यह संकेत नहीं मिलते कि सरकार तकनीकी प्रशिक्षण कार्यक्रमों को समेट लेना चाहती है। यदि सरकार का ऐसा इरादा होता तो वह समिति का गठन ही न करती। देश के विकास की ऐसी कोई योजनाएं सफल नहीं हो सकती जिनमें तकनीकी और वैज्ञानिक प्रशिक्षण का प्रावधान न हो। यह मशीनी युग है। युद्धोपरांत संघर्ष में वही देश जीवित रह सकता है और अपनी जनता के जीवन-स्तर को ऊपर उठा सकता है जहां तकनीकी और वैज्ञानिक प्रशिक्षण शिखर पर हो। भारत सरकार इस स्थिति से अनभिज्ञ नहीं है और वह देखेगा कि तकनीकी प्रशिक्षण योजना न केवल चलाई जाए बल्कि वह देश की शिक्षा प्रणाली का एक स्थायी अंग बन जाए।
उद्योगों द्वारा इन प्रशिक्षितों को खपाया जाना चाहिए
सरकार का यह उद्देश्य तो है पर योजना की सफलता इस संभावना पर निर्भर करती है कि इन प्रशिक्षितों को रोजगार मिले। यदि प्रशिक्षण प्राप्त करने के पश्चात लोगों को रोजगार नहीं मिलेगा, तो तकनीकी प्रशिक्षण योजना विफल समझी जानी चाहिए। इस प्रश्न का उत्तर उद्योगों का उन लोगों के प्रति रवैये पर निर्भर है जो इन केंद्रों से प्रशिक्षण पाकर निकलते हैं। यदि उद्योग उन्हें रोजगार नहीं देता है तो तकनीकी प्रशिक्षण की कोई परवाह नहीं करेगा और प्रशिक्षण केंद्र बंद करने होंगे। इस दुर्भाग्यवश परिणाम से तभी बचा जा सकता है जब असैनिक उद्योग इन प्रशिक्षितों को खपाने में रुचि दिखाएं।
6000 अतिरिक्त प्रशिक्षितों में से असैनिक उद्योगों ने केवल 3000 को काम दिया है। दरअसल वे अप्रशिक्षित लोगों को रखना चाहते हैं क्योंकि वे समझते हैं कि वे नौकरी के दौरान या प्रशिक्षुओं के रूप में कुशलता और प्रशिक्षण प्राप्त कर लेंगे। हमारे प्रशिक्षण केंद्रों से प्रशिक्षण पाए लोगों को नौकरी देने में उद्योगों की अनिच्छा के कई कारण है। मुझे शिकायत मिली है कि हमारा प्रशिक्षण अपर्याप्त है। असैनिक उद्योगपतियों का बल इस बात पर होता है कि उनके कार्मिक की दक्षता उच्च स्तर की हो अपेक्षाकृत उसके जो हमारे केदं्रों से प्राप्त होती है। इसमें कोई शक नहीं कि हमारा प्रशिक्षण युद्ध के दबाव में हुआ - आठ महीने के भीतर प्रशिक्षण देना जिसके युद्ध-पूर्व 5 साल लगते थे।