कुशल श्रमिकों को युद्धोपरांत रोजगार
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फिर भी मुझे विश्वास है कि असैनिक उद्योगों की आवश्यकताओं को देखते हुए यह जरूरी नहीं कि प्रशिक्षण की अवधि पांच वर्ष की हो। अन्य देशों में युद्ध काल के जो अनुभव हैं उनके अनुसार सघन प्रशिक्षण से अर्धकुशल व्यक्तियों को अधिकांश उद्योगों में जल्दी प्रशिक्षित किया जा सकता है।
उद्योगों का दायित्व
तकनीकी प्रशिक्षण कार्यक्रम के अनुसार जो प्रशिक्षण दिया जाता है, यदि उसको और ‘विशिष्टता’ प्रदान कर दी जाए तो असैनिक उद्योगों द्वारा ऐसे प्रशिक्षित लोगों को स्वीकार किया जाना चाहिए। बहरहाल मैं यह स्वीकार करने के लिए तैयार हूं कि हमारे प्रशिक्षण में दोष हैं। मैं किसी भी प्रकार के तर्कसंगत परिवर्तन के लिए तैयार हूं जिससे प्रशिक्षित लोगों को उद्योगों में लिया जा सके। परंतु जब तक उद्योग हमारे प्रशिक्षितों को खपाने के लिए तैयार नहीं होते, तब तक इस देश में तकनीकी प्रशिक्षण सेवा की सफलता की आशा नहीं है। इसलिए उद्योगों को यह समझना चाहिए कि उनके कंधों पर एक बड़ा दायित्व है।
महानुभाव, आपको उद्योग की आवश्यकता का मुझ से अधिक ज्ञान है। मैं तो इतना ही कह सकता हूं कि यदि यह योजना को सफल बनाना है तो इसके लिए उद्योगों और श्रमिकों का सहयोग चाहिए। अब हम समय बर्बाद न करें वरना हम पाएंगे कि हमने युद्ध तो जीत लिया, पर शांति खो दी।
जैसाकि मैंने पहले ही कहा है, हमारे सामने दो विचारणीय प्रश्न हैंः (1) उन प्रशिक्षित लोगों को रोजगार दिलाना जो युद्ध के बाद सेना से हटा दिए जाएंगे और उन प्रशिक्षुओं के लिए रोजगार दिलाना जो प्रशिक्षण का निर्धारित कार्यक्रम पूरा कर रहे हैं, (2) युद्धोपरांत औद्योगिक पुनर्निर्माण के परिप्रेक्ष्य में तकनीकी प्रशिक्षण की योजना में संशोधन करना। इन दोनों अलग-अलग प्रश्नों को हमें अलग-अलग ढंग से हल करना है। इसलिए हमने इसे बेहतर समझा है कि हम दो चरणों में काम करें। दूसरे चरण के लिए प्रासंगिक प्रश्न हैः अपने तकनीकी प्रशिक्षण कार्यक्रम को असैनिक उद्योगों के लिए पूर्णतः अनुकूल बनाने के लिए इसमें हमें कौन से परिवर्तन करने चाहिए? इसके लिए दीर्घकालीन नीति की आवश्यकता है जिससे कि युद्ध के बाद देश में उद्योगों के विकास के लिए तकनीकी कार्मिक उपलब्ध कराए जा सकें।
कुशल कर्मचारियों को रोजगार
पहले चरण के लिए हमें जिस प्रासंगिक समस्या पर विचार करना है वह है हमारे उन हजारों प्रशिक्षित कर्मचारियों को पुनर्रोजगार देना जिन्हें इन प्रशिक्षण केंंद्रों से प्रशिक्षण दिया गया है और जो सेना में कार्य कर रहे हैं तथा जिन्हें युद्ध समाप्त