33. कुशल श्रमिकों को युद्धोपरांत रोजगार - Page 198

कुशल श्रमिकों को युद्धोपरांत रोजगार

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समिति में विचार-विमर्श

बाद में समिति ने तकनीकी शिक्षा से संबंधित विभिन्न समस्याओं पर विचार किया और तकनीकी प्रशिक्षुओं का शैक्षिक स्तर सुधारने पर बल दिया। श्रम विभाग के संयुक्त सचिव श्री एस. लाल ने अध्यक्षता की।

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ऽरोजगार दफतर का दौरा

डॉ. बी. आर. अम्बेडकर 23 अगस्त को कलकत्ता पहुंचे। उन्होंने कलकत्ता के रोजगार दफतर का निरीक्षण किया। उनके साथ भारत सरकार के श्रम विभाग के संयुक्त सचिव और लंदन में भारत के भूतपूर्व उच्चायुक्त श्री एस. लाल भी थे।

श्रम सदस्य ने कलकत्ता में रोजगार कार्यालय कार्यक्रम के संचालन और राष्ट्रीय सेवा (तकनीकी कार्मिक) अध्यादेश के संबंध में बंगाल के श्रमायुक्त श्री ए. हयुघेस के साथ विचार-विमर्श किया। इस बात पर भी विचार किया गया कि भारत सरकार की इस नीति के संबंध में बंगाल में तकनीकी प्रशिक्षण केंद्रों को बंदकर देने की नीति पर भी चर्चा की जाए।

डॉ. अम्बेडकर ने नाम दर्ज कराने के लिए रोजगार दफतर में भारी संख्या में आए मजदूरों को भी देखा। श्री हयुघेस और श्री बैनेट (कार्यालय के प्रबंधक) ने पंजीकरण की प्रक्रिया और कार्ड इंडैक्स प्रणाली के विषय मे जानकारी दी।

रोजगार आंकड़ों में वृद्धि

श्रम सदस्य ने देखा कि रोजगार दफतर में उम्मीदवारों की संख्या में बराबर वृद्धि हो रही है। उन्हें बताया गया कि नवीनतम प्राप्त आंकड़ों के अनुसार तकनीकी प्रशिक्षण योजना में प्रशिक्षित 1029 लोगों ने अपने नाम दर्ज कराए, जिनमें से 388 को काम मिल गया है! जनवरी, 1914 से 31 जुलाई, 1944 तक पंजीकृत तकनीकी कार्मिकों की कुल संख्या 2254 थी। इनमें से 551 को रोजगार दिलाया गया।

डॉ. अम्बेडकर और दल के अन्य सदस्यों को एक तालिका दिखाई गई जिसमें बंगाल में तकनीकी शिक्षा कार्यक्रम की नवीनतम स्थिति दर्शायी गई थी। उन्हें बताया गया कि 4164 व्यक्तियों को प्रशिक्षण देने की क्षमता वाले 24 केंद्र मौजूद हैं। इसके अतिरिक्त 2270 लोगों को असैनिक प्रशिक्षण देने की क्षमता वाले 15 केंद्र और हैं। इनमें से सतह तकनीकी संस्थान हैं और दो का संबंध औद्योगिक उपक्रमों से है। 31

ऽ इंडियन इनफोर्मेशन, 15 सितम्बर, 1944, पृष्ठ 278