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ऽत्रिपक्षीय श्रम सम्मेलन का पूर्ण अधिवेशन
डॉ. अम्बेडकर का सम्बोधन
27 अक्तूबर को नई दिल्ली में आयोजित त्रिपक्षीय श्रम सम्मेलन के पूर्ण अधिवेशन की अध्यक्षता करते हुए, श्रम सदस्य, भारत सरकार, माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ने सुझाव दिया कि दो साल के दौरान पाई गई संगठनात्मक कमियों को दूर करने के लिए सम्मेलन गठन में परिवर्तन किए जाएं।
उन्होंने कहा कि सम्मेलन के कार्य क्षेत्र में आने वाले विषयों को दो सूचियों में बांटा जाना चाहिए। पहली सूची में सभी सामान्य विषय होने चाहिए जैसे रोजगार की शर्तें, श्रम कानून और सामाजिक सुरक्षा से संबद्ध प्रश्न। दूसरी सूची में श्रम कल्याण और श्रम कानूनों के संबंध में ठोस प्रश्नों को रखा जाए।
डॉ. अम्बेडकर के भाषण का पूरा पाठ इस प्रकार हैः-
‘‘किसी सभापति के लिए यह कार्य बहुत ही सरल और आकर्षक होगा कि उसे सभा में एकत्र हुए प्रतिनिधियों का मात्र स्वागत और आभार प्रकट करना पड़े। परंपरा यही है कि सभापति को इससे अधिक भी कुछ कहना होता है। श्रम सम्मेलन जैसे अवसर पर सभापति के लिए अपने भाषण का विषय चुनना कोई आसान काम नहीं है। यह कोई दार्शनिकों का सम्मेलन नहीं है। सभापति केवल वाग्जाल से लोगों को विमोहित करके ही पिंड नहीं छुड़ा सकता है। उसके ऐसे शब्दाडंबर से काम नहीं चलेगा जिसका कोई सामाजिक महत्व न हो। यह समाज के पुनर्निर्माण का सम्मेलन नहीं है और इसका सभापति मात्र पूंजीवाद, समाजवाद, साम्यवाद और अन्य विचारधाराओं के दोष गिनवा कर ही अपनी बात समाप्त नहीं कर सकता।’’
‘‘यह किसी नैतिक संस्था का सम्मेलन नहीं है और इसका सभापति भावनाएं भड़काने के लिए सदाचरण की शिक्षा देकर ही नहीं बैठ सकता। मैं नहीं कह सकता
ऽ इंडियन इनफोर्मेशन, 15 नवम्बर, 1944, पृष्ठ 590-97