34. त्रिपक्षीय श्रम सम्मेलन का पूर्ण अधिवेशन - Page 202

त्रिपक्षीय श्रम सम्मेलन का पूर्ण अधिवेशन

पृथक सचिवालय

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सम्मेलन के कुछ सदस्यों ने एक दूसरी समस्या की ओर संकेत किया है, अर्थात श्रम सम्मेलन के अलग सचिवालय का न होना। यह सुझाव दिया गया है कि निम्नांकित कार्यों के निष्पादन के लिए अलग सचिवालय होना चाहिएः

(क) बैठक की तैयारी अर्थात दस्तावेजों का वितरण, सदस्यों को निर्धारित

तिथि और कार्य-सूची के बारे में अवगत कराना।

(ख) कार्यवाही का वृत्तांत तैयार करना।

(ग) इश्तहारों और भ्रमण द्वारा प्रचार।

(घ) वित्तीय प्रशासन, जैसे सम्मेलन में भाग लेने वाले गैर-सरकारी सदस्यों

के यात्रा भत्ता बिल तैयार करना।

(ड.) विचार-विमर्श और सिफारिशों के लिए आधार गवेषण तथा सूचना

संग्रह।

(च) सरकार द्वारा उठाए गए कदमों पर निगरानी।

शिकायत के आधार दो और मामले होते हैं और उनमें से एक है श्रम सम्मेलन और स्थायी समिति की कार्यसूची तैयार करना। कार्यसूची तैयार करने की वर्तमान प्रक्रिया में दो प्रकार की कमियां बताई गई हैं। पहली बात तो यह है कि सम्मेलन और समिति सदस्य कार्यसूची में वे विषय सम्मिलित नहीं करा सकते जिन्हें वे चाहते हैं। दूसरी यह है कि कार्यसूची के साथ जो ज्ञापन दिया जाता है वह इतनी देर से पहुंचता है कि उसके पढ़ने-समझने के लिए इतना समय नहीं होता कि किसी विषय पर विचार-विमर्श में योगदान किया जा सके।

शिकायत का दूसरा मामला सम्मेलन और स्थायी श्रम समिति में विभिन्न पक्षों के प्रतिनिधित्व से संबद्ध है। नियोक्ताओं के तीन प्रतिनिधियों को सरकार द्वारा मनोनीत किया जाता है। नियोक्ताओं का कथन है कि एम्प्लायर्स फेडरेशन आफ इंडिया और ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन आफ इंडस्ट्रीयल एम्पलायर्स देश के नियोक्ताओं की पूर्णतया प्रतिनिधि संस्थाएं हैं, इसलिए नियोक्ताओं के और अधिक प्रतिनिधियों का मनोनयन किया जाना आवश्यक है। श्रमिकों का प्रतिनिधित्व भी दोषपूर्ण बताया गया है क्योंकि जो लोग श्रमिकों का प्रतिनिधित्व करते हैं, वे वास्तव में श्रमिक वर्ग से नहीं आते।

आप स्वाभाविक रूप से जानना चाहेंगे कि हम इस संबंध में क्या कदम उठाने के लिए तैयार हैं। मैं अपनी ओर से हर कदम उठाने के लिए तैयार हूं ताकि श्रम सम्मेलन ढंग से काम करे और व्यवस्था तंत्र में किसी प्रकार की गलती के कारण