34. त्रिपक्षीय श्रम सम्मेलन का पूर्ण अधिवेशन - Page 203

178 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

उसे आघात न पहुंचे। फिर भी, आप इस बात का अहसास करेंगे कि कुछ मामले ऐसे हैं जिन पर कोई फैसला लेने से पूर्व उनकी छानबीन की जाए और जांच की जाए। ऐसी भी कुछ बातें हैं जिनकी अभी जांच ही नहीं की गई है। पहले में उन प्रश्नों का जिक्र करूंगा जिनके बारे में विचार करके सरकार एक निर्णय पर पहुंची है। उनमें अलग सचिवालय, कार्यसूची और प्रतिनिधित्व के प्रश्न शामिल हैं।

मात्र एक परामर्शदात्री संस्था

‘‘मैं समझता हूं कि श्रम सम्मेलन के पृथक सचिवालय की मांग, अंतर्राष्ट्रीय श्रम सम्मेलन की संगति पर आधारित है। सरकार समझती है कि अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन और हमारा त्रिपक्षीय संगठन बिल्कुल अलग चीजें हैं। तथ्य यह है कि अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन वारसा शांति संधि के अंतर्गत बनाया गया है। इस संगठन की सिफारिशों में एक प्रकार की अनिवार्यता होती है और सदस्य राष्ट्रों द्वारा उनका पालन न करने से कुछ अंतर्राष्ट्रीय दायित्व भुगतने पड़ते हैं। यह केवल अपने नियमों के पालन से ही नियंत्रित होता है और किसी बाहरी अधिकार को मानने के लिए बाध्य नहीं है। इसके साथ ही, अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन की स्वयं अपनी वित्तीय व्यवस्था है और वह अपना दायित्व निभाने के लिए जब भी कोई कार्य करना चाहे कभी किसी सरकार या विभाग पर निर्भर नहीं करता है।

हमारा त्रिपक्षीय संगठन आर्थिक दृष्टि से उतना स्वावलंबी नहीं है जितना अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन। उसकी स्वतंत्र अर्थ व्यवस्था नहीं है और न ही हो सकती है। यह मात्र परामर्शदात्री संस्था है और सरकार को उन्हीं मामलों में परामर्श देती है जिन पर उससे सलाह मांगी जाती है। यह कोई निर्णय नहीं ले सकती। यदि उसे ऐसी अनुमति दी गई तो वह विधायिका के अधिकारों को हड़प लेगी। इसी भेद के कारण यह स्पष्ट है कि श्रम सम्मेलन का स्वतंत्र सचिवालय, सरकार और सम्मेलन के बीच दरार पैदा कर सकता है।

यह सच है कि अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन की कार्यकुशलता का स्रोत मुख्य रूप से इसका सचिवालय और अच्छा काम है। भारत सरकार समझती है कि गवेषणा और सूचना को छोड़कर सचिवालय का सभी काम भारत सरकार का श्रम सचिवालय कर सकता है। जहां तक गवेषणा और सूचना का प्रश्न है, श्रम और संबद्ध प्रश्नों पर गवेषणा और सूचनाएं एकत्र करने के लिए एक आवश्यक मशीनरी स्थापित की जाए। इस कारण भारत सरकार त्रिपक्षीय संगठन के लिए पृथक सचिवालय के पक्ष में नहीं है।