34. त्रिपक्षीय श्रम सम्मेलन का पूर्ण अधिवेशन - Page 204

त्रिपक्षीय श्रम सम्मेलन का पूर्ण अधिवेशन

कार्यसूची तैयार करने का अधिकार

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कार्यसूची के संबंध में सरकार ने विचार किया। सरकार का फैसला यह है कि कार्यसूची निश्चित करने का अधिकार सम्मेलन को नहीं सौंपा जा सकता। सम्मेलन विधानमंडल नहीं है। यह एक परामर्शदात्री संस्था है और यह निर्धारित करना सरकार का काम है कि किन विषयों पर सलाह लेने की आवश्यकता है।

एक अन्य बात भी है जिसके कारण सरकार कार्यसूची तय करने का काम सम्मेलन को नहीं सौंप सकती। सरकार कार्यसूची में तब तक कोई विषय शमिल नहीं करती जब तक वह इस स्थिति में न हो कि सम्मेलन के समक्ष वे तथ्यपूर्ण विवरण रखे जा सकें जो सदस्यों के लिए विचार-विमर्श के दौरान लाभकारी हो, और उन पर अपने विचार प्रकट करने से पूर्व सदस्यों को उन पर गौर करने का पर्याप्त समय मिल सके। इसलिए उसके लिए यह स्वीकार करना संभव नहीं है कि कार्यसूची की सामग्री निश्चित करने का काम सम्मेलन को सौंप दे। सरकार के लिए यह संभव नहीं है कि बिना पर्याप्त समय मिले वह विवरण तैयार कर सके। परंतु कार्यसूची तैयार करने के अपने अधिकार के बारे में सरकार प्रक्रिया बदलने को तैयार है।

मौजूदा प्रक्रिया है कि एक बैठक के समापन पर श्रम विभाग दूसरी बैठक की कार्यसूची तैयार करने के लिए पहली बैठक के विषयों में से चयन किए गए मुद्दों पर सरकारों, नियोक्ताओं तथा श्रम संगठनों के सुझाव आमंत्रित करता है। सरकार अथवा समिति के बीच यह फैसला लेने से पहले कोई विचार-विमर्श नहीं होता कि कार्यसूची में कौन से विषय रखे जाएं। संशोधित प्रक्रिया के अनुसार, सरकार कार्य-सूची के लिए नियोक्ता और श्रम संगठन कभी भी सुझाव भेज सकते हैं। यदि वे सुझाव नहीं भेजते हैं तो सरकार प्रत्येक बैठक में प्रतिनिधियों को सुझाव आमंत्रित करेगी।

सरकार एक और परिवर्तन करने को तैयार है कि अंतिम फैसला तो सरकार के हाथ में रहेगा परंतु कार्यसूची तैयार करने के विषय में प्राप्त सभी सुझावों को विचार-विमर्श के लिए हर बैठक में रखा जाएगा। इससे सरकार को यह अवसर प्राप्त होगा कि वह सदस्यों की इच्छा को जान सके और सदस्यों को यह अवसर मिलेगा कि वे अपनी प्राथमिकताएं बता सकें। मुझे विश्वास है कि आप इस बात से सहमत होंगे। मौजूदा स्थिति पर यह एक बड़ा सुधार है।

समिति के गठन के विषय में मैं कहूंगा कि इसके लिए जो सुझाव दिए गए हैं उनमें काफी वजन है। यदि नियोक्ताओं के दोनों संगठन दावा करते हैं कि वे सभी का पूरा प्रतिनिधित्व करते हैं तो अन्य नियोक्ताओं का मनोनयन स्पष्टतः न्यायसंगत नहीं है। इसी प्रकार, यह आश्वस्त करना भी आवश्यक है कि श्रमिक वर्ग केवल अपनी रोजगार और कल्याण संबंधी समस्याओं पर ही विचार करने तक सीमित न