180 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
रहे और उसे अपना कार्य स्वयं करने के लिए प्रशिक्षित किया जाए। यह तभी हो सकता है जब कि श्रमिक स्त्रियां और पुरुष सभी श्रम सम्मेलन में भाग लें। आपको इस तथ्य का पता होगा कि हाल ही में जब खान कल्याण समिति का गठन किया गया था तो सरकार ने कदम उठाया कि समित में कोयला खान श्रमिकों में से एक स्त्री और एक पुरुष को प्रतिनिधित्व दिया जाए।
गठनः कुछ सुझाव
सरकार सम्मेलन के गठन के बारे में समुचित परिवर्तनों के विरुद्ध नहीं है। साथ ही सरकार यह भी अनुभव करती है कि सम्मेलन के गठन में परिवर्तन करने की कोई तात्कालिक आवश्यकता नहीं है और हम उस पर विचार कुछ समय के लिए टाल सकते हैं। जैसाकि मैंने पहले त्रिपक्षीय सम्मेलन में कहा था, हमें जल्दी-जल्दी उलट-पुलट नहीं करना चाहिए और देखना चाहिए कि उसमें कुछ जमाव आया है या नहीं। बार-बार उखाड़ कर देखने से पौधा मर जाता है।
मैं अब सम्मेलन के गठन की कमजोरियों पर आता हूं। सरकार इस कमजोरी को गंभीर मानती है और इसमें सुधार होना चाहिए। परंतु अभी सरकार किसी नतीजे पर नहीं पहुंची है। आप जो सुझाव देंगे सरकार उनका स्वागत करेगी। इस विषय पर मैं अपने विचार रखना चाहता हूं। मैं इसके गठन में निम्नांकित परिवर्तन चाहता हूंः-
- सम्मेलन के सामने आने वाले विषयों को मैं दो सूचियों में विभाजित करना
चाहता हूं। सभी सामान्य विषय पहली सूची में होंगे जैसे (क) नौकरी की
शर्तें_ (ख) श्रम कानून, और (ग) सामाजिक सुरक्षा से जुड़े प्रश्न। सूची दो
में ये विषय रहेंगे (क) श्रम कल्याण से संबंधित प्रश्न (ख) श्रम कानूनों
के पालन से संबद्ध मामले। पहली सूची पूर्ण सम्मेलन के लिए होगी। जिसके
नाम के विषय में मेरा प्रस्ताव है कि वह पूर्ण और त्रिपक्षीय न कहलाकर
केवल श्रम सम्मेलन कहलाए। यह एक लोकप्रिय नाम होगा।
- श्रम कल्याण समिति के नाम से एक नई संस्था का गठन हो और इसे दूसरी
सूची के काम सौंपे जाएं।
- श्रम कल्याण समिति का गठन इस प्रकार होगाः- (क) स्थायी श्रम समिति
द्वारा चुने गए सदस्य_ (ख) संगठित उद्योगों और नगरपालिका तथा रोजगार
देने वाली अन्य संस्थाओं के नियोक्ताओं और श्रमिकों का एक एक प्रतिनिधि_
(ग) सरकार द्वारा मनोनीत गैर-सरकारी सदस्य_ (घ) भारतीय रियासतों के
प्रतिनिधि_ और (ड.) प्रांतीय सरकारों के प्रतिनिधि।