त्रिपक्षीय श्रम सम्मेलन का पूर्ण अधिवेशन
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- जहां तक स्थायी श्रम समिति का प्रश्न है उसके गठन के संबंध में कोई
परिवर्तन नहीं किया जाएगा। उसके कार्यों में ही परिवर्तन होगा। यह केवल
विचारक संस्था ही नहीं होगी। यह सम्मेलन की अभिकर्ता होगी और उन
कर्तव्यों को निभएगी जो सम्मेलन द्वारा इसे समय-समय पर सौंपे जाएंगे।
इस प्रकार इस व्यवस्था के अंतर्गत अंग होंगेः सम्मेलन, स्थायी समिति और कल्याण समिति।
सम्मेलन के कार्य और अधिकार इस प्रकार होंगेः-
- रोजगार की शर्तों से संबंधित मामलों और सामाजिक सुरक्षा के संबंध में
सरकार से कार्यसूची में रखे जाने योग्य मामलों की सिफारिश करना।
- ऐसे मामले स्थायी समिति को भेजना और यह हिदायत देना कि इन पर (क)
सम्मेलन को पुनः रिपोर्ट दी जाए या (ख) सरकार से सिफारिश की जाए।
- एक तदर्थ स्थायी समिति की नियुक्ति करना जो कार्यसूची के मुद्दों पर विचार
करे और उसका एक निदेशक हो जो अपनी रिपोर्ट (क) सम्मेलन को_ और
(ख) स्थायी समिति को भेजे ताकि उन पर सरकार से सिफारिशें की जा
सके और सम्मेलन को एक और रिपोर्ट दी जा सके।
स्थायी श्रम समिति के कार्य और अधिकार वही रहेंगे जो सम्मेलन द्वारा निर्धारित किए जाएंगे। यह सम्मेलन की एक अभिकर्ता होगी और इसे जो भी अधिकार सौंपे जाएंगे वह सम्मेलन ही सौंपेगा। निम्नांकित अपवादों को छोड़कर, यह ऐसा कोई कार्य नहीं करेगी जो इसे सम्मेलन ने नहीं सौंपा है। लेकिन यह सरकार के ऊपर निर्भर होगा कि वह ऐसे मामले को जिस पर वह शीघ्र राय जानना चाहती है सीधे स्थायी श्रम समिति को सौंप दे जो अपनी रिपोर्ट सम्मेलन को या सरकार को दे। परंतु आमतौर पर स्थायी श्रम समिति की कोई भी रिपोर्ट अथवा सिफारिश सम्मेलन को भेजी जानी चाहिए।
स्थायी श्रम समिति के निम्नलिखित अधिकार होंगेः
सम्मेलन द्वारा सौंपे गए मामलों पर सिफारिश करना अथवा रिपोर्ट देना_
ऐसे मामले पर जिसके बारे में सम्मेलन द्वारा स्थायी श्रम समिति को यह
हिदायत दी गई है कि वह सरकार को रिपोर्ट दे_ और
- कार्यसूची के किसी भी मामले पर तदर्थ समिति की उस निर्देश के साथ
नियुक्ति करना कि वह अपनी रिपोर्ट स्थायी क्रम समिति को दे।