त्रिपक्षीय श्रम सम्मेलन का पूर्ण अधिवेशन
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मैंने कोई नई बात नहीं कही है, इसलिए मैं यह धन्यवाद करते हुए अपनी बात समाप्त करता हूं कि आपने मुझे धैर्य से सुना। अब हम अपना अगला कार्य निपटाएं जो हमारी प्रतीक्षा कर रहा है।
डॉ. अम्बेडकर का ज्ञापन
त्रिपक्षीय श्रम सम्मेलन और उसकी स्थायी श्रम समिति में हुए विचार-विमर्श के पश्चात केंद्रीय सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का ब्यौरा डॉ. अम्बेडकर ने श्रम सम्मेलन में रखे गए ज्ञापन में दिया। ज्ञापन में शामिल विषय हैंः श्रम विवादों का निपटारा, श्रम कल्याण, औद्योगिक श्रमिकों को खाद्यान्न की आपूर्ति, सरकारी ठेकों में बेहतर वेतन की शर्त का प्रावधान, औद्योगिक उपक्रमों में श्रम अधिकारी, रोजगार कार्यालय, औद्योगिक आंकड़े, मंहगाई भत्ता, औद्योगिक जलपान-गृह।
मई, 1943 को स्थायी श्रम समिति की तीसरी बैठक में यह निष्कर्ष निकला था कि भारत सरकार रोजगार कार्यालय खोलने का कार्य जारी रखे। भारत सरकार की ओर से तकनीकी कार्मिकों के विषय में विज्ञापन वर्जित करने का प्रस्ताव भी रखा गया था जिसे आम तौर से स्वीकार कर लिया गया था। दोनों प्रस्ताव लागू हो गए हैं। तकनीकी कार्मिकों को रोजगार दिलाने के लिए कई केंद्रों पर रोजगार दफतर
खोल दिए गए हैं।
इस बैठक में आम राय यह थी कि (1) विवादों में न्यायाधिकरण द्वारा निर्णय देने की व्यवस्था न्यूनाधिक जारी रहे, और (2) श्रम विवादों के बारे में पूरी नीति नए सिरे से तैयार की जाए और 1929 के श्रम विवाद अधिनियम के स्थान पर एक नया अधिनियम बनाया जाए जिसमें आंतरिक समझौतों को प्रोत्साहन दिया जाए। नए अधिनियम का प्रस्ताव केंद्र सरकार के विचाराधीन है जबकि मद संख्या (1) की सूचना उन प्रांतीय सरकारों को भेज दी गई है जो एक सततता बनाए हुए हैं। सरकार श्रम विवादों के प्रस्तावों पर विचार कर रही है।
बेविन प्रशिक्षण योजना
इस बैठक में एक अन्य प्रश्न यह उठा था कि राष्ट्रीय सेवा श्रम न्यायाधिकरणों में संगठित श्रमिकों को सहयोजित किया जाए जो बेविन प्रशिक्षुओं का चयन कर सकें, और उम्मीदवारों के चयन के समय न्यायाधिकरण अपने क्षेत्र के प्रमुख मजदूर संघों से परामर्श करें। प्रशिक्षुओं के चयन की इस प्रणाली पर विचार किया जा रहा है। श्रम कल्याण कोष बनाने पर सरकार विचार कर रही है, किंतु ज्ञापन में कहा गया है कि इस संबंध में कोई व्यावहारिक कार्यक्रम चलाने में भारी कठिनाइयां हैं।?