184 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
जनवरी, 1948 में स्थायी श्रम समिति की दूसरी बैठक में औद्योगिक मजदूरों को प्रबंधकों द्वारा चालित सस्ते मूल्य की दुकानों, मान्यताप्राप्त मजदूर संघों की एसोसिएशन द्वारा स्वीकृत और श्रमिकों के अन्य प्रतिनिधियों की दुकानों से अनाज की आपूर्ति और औद्योगिक श्रमिकों के लिए सहकारी समितियों की दुकानों को प्रोत्साहन देने का प्रस्ताव पारित किया गया था। यह सिफारिशें उचित अधिकारियों के ध्यान में ला दी गई हैं। बड़े शहरों और छोटे कस्बों में राश्निंग प्रणाली शुरू हो जाने से और छोटे कस्बों में इसे धीरे-धीरे लागू करते जाने के कारण उन उपायों की प्रासंगिकता अब नहीं रही है जिनकी सिफारिश की गई थी। परंतु राशनिंग अधिकारी प्रबंधकों द्वारा स्थापित अनाज की दुकानों का अधिकाधिक उपयोग कर रहे हैं।
बेहतर वेतन का प्रावधान
ज्ञापन में मई 1943 की सहमति का हवाला दिया गया कि स्थायी समिति की तीसरी बैठक में सरकारी ठेकों में बेहतर वेतन का प्रावधान किए जाने की सिफारिश की गई थी। ज्ञापन में बताया गया कि केंद्रीय लोक निर्माण विभाग के ठेके के नियमों में ‘‘उचित वेतन’’ की व्यवस्था पहले ही मौजूद है।
अपने उपक्रमों में भी केंद्र सरकार ने उन सिफारिशों को लागू कर दिया है कि जहां तक संभव हो सभी बड़े औद्योगिक उपक्रमों में श्रम अधिकारी नियुक्त किए जाएं। प्रांतीय और रियासती सरकारों और निजी नियोक्ताओं से भी कहा गया है कि वे भी ऐसा ही करें। भारतीय खान एसोसिएशन से रिपोर्ट मिली है कि उन्होंने कार्मिक अधिकारियों की नियुक्ति कर दी है।
समिति का एक सुझाव था कि विवाद के मामलों की एक क्रमवार सूची तैयार की जाए जिसके अनुसार कि उन्हें न्यायनिर्णय के लिए सौंपा जाए। तदनुसार, भारत रक्षा नियम 81(ख) में संशोधन कर दिया गया है। प्रांतीय सरकारों का ध्यान इस ओर आकर्षित किया गया है कि वे इस प्रकार का प्रावधान करें कि जिन कर्मचारियों के व्यवहार की जांच की जा रही है या जिनका विवाद से तुरंत संबंध है उन्हें मालिक द्वारा नौकरी से नहीं निकाला जाए। किन्तु उन मामलों पर यह निर्देश लागू नहीं होगा जिनका गलत व्यवहार उस विवाद से संबद्ध नहीं हैं, या फिर न्यायाधिकरण या अन्य संबंधित अधिकारी से यह अनुमति ले ली गई है। चुनिंदा उद्योगों में वेतन, आय और काम के घंटों के बारे में आंकड़े संकलित करने के मुद्दे पर अखिल भारतीय स्तर पर विचार किया जा रहा है।