34. त्रिपक्षीय श्रम सम्मेलन का पूर्ण अधिवेशन - Page 210

त्रिपक्षीय श्रम सम्मेलन का पूर्ण अधिवेशन

जबरन बेरोजगारी

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1943 के पांचवें श्रम सम्मेलन में इस बात पर सर्वसम्मति थी कि उन मामलों में किसी प्रकार की राहत की आवश्यकता है जहां कोयले या कच्चे माल की कमी के कारण कर्मचारियों को उनकी इच्छा न होने पर भी बेरोजगारी का सामना करना पड़ता है। केंद्र सरकार ने प्रांतीय सरकारों को एक परिपत्र भेजा है जिसमें सिफारिश की गई है कि परिपत्र में उल्लिखित सिद्धांतों क अनुसार ऐसे सिद्धांत निर्धारित करें जिनका पालन करते हुए राहत राशि स्वीकार की जाए। यह पत्र रियासतों को भी भेज दिया गया है। इस अधिवेशन में मजदूरों ने जबर्दस्त मांग की थी कि विधानमंडल में और स्थानीय संस्थाओं में उनका समुचित प्रतिनिधित्व होना चाहिए। यह मामला विचाराधीन है और ज्ञापन में कहा गया है कि पुनर्निर्माण नीति समितियों, केंद्रीय स्वास्थ्य सर्वेक्षण विभागीय समितियों, केंंद्रीय खाद्य सलाहकार समिति आदि केंद्र सरकार की समितियों में मजदूरों को प्रतिनिधित्व दिया जाए।

वेतन और आय

मजदूरों के लिए सामाजिक सुरक्षा के बारे में कार्यक्रम तैयार करने के उद्देश्य से समुचित सूचनाएं उपलब्ध कराने के लिए इस अधिवेशन में एक संकल्प पारित किया गया कि मजदूरों के वेतन और आय रोजगार और आवास तथा सामाजिक दशा के प्रश्नों पर विचार करने के लिए एक व्यवस्था स्थापित की जाए। इसी संकल्प के संदर्भ में एक श्रमिक जांच समिति बनाई गई है और इसकी रिपोर्ट 1945 के मध्य तक मिल जाएगी।

ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि जिन उद्योगों में कर्मचारियों की संख्या ढाई सौ या इससे अधिक है वहां स्थायी आदेश लागू करने के बारे में प्रांतीय सरकारों, रियासतों, मालिकों और कर्मचारी संघों के साथ परामर्श किया गया था और इस बारे में भारत रक्षा अधिनियम के अंतर्गत वैधानिक अधिकार प्रयोग किए जाने के प्रति आम विरोध प्रकट किया गया। इस मामले में शीघ्र ही कोई स्थायी कानून लागू किए जाने की बात ज्ञापन में कही गई है। इस बीच मालिकों के दो अखिल भारतीय संगठनों से अनुरोध किया गया है कि जब तक संपूर्ण कानून तैयार हो तब तक वे स्थायी आदेश ही लागू करें। स्थायी आदेश तैयार करने में मालिकों की सहायतार्थ एक ज्ञापन उन्हें भेजा गया है।

चौथी स्थायी श्रम समिति की बैठक में कानून वेतन नियंत्रण के संबंध में विचार-विमर्श के दौरान वेतन नियंत्रण संबंधी व्यवस्था स्थापित करने के बारे में एक सहमति उभर कर सामने आई। मौजूदा श्रम सम्मेलन की कार्यसूची में यह बात