18 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
उन्हें अनेक कामगारों का विश्वास प्राप्त हुआ और अस्पृश्यता के विरुद्ध अभियान में दलित वर्ग के नेता के रूप में उन्हें प्रतिष्ठित कर दिया।
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अस्पृश्यता के विरुद्ध अभियान
इस अभियान की दो अभूतपूर्व घटनाएं उल्लेखनीय हैं। इनमें से प्रथम घटना कोलावा जिले के महाद में चौदर तालाब के सत्याग्रह के रूप में जानी जाती है जब उन्होंने किसी विशेष तालाब से पानी लेने के दलित वर्ग के सदस्यों के अधिकार को लेकर विशाल प्रदर्शनों का आयोजन किया। जब अछूतों ने पानी लिया तो कइयों के सिर फूटे और डॉ. अम्बेडकर को पुलिस की सहायता लेने के लिए मजबूर होना पड़ा। किंतु अछूतों को अपना लक्ष्य मिल गया। सबसे महत्वपूर्ण बात यह थी कि उनमें अपने अस्तित्व की भावना जागी और मानव के रूप में अपने सम्मान के प्रति जागरूकता पैदा हुई जिसके सहारे अपने उद्धार के लक्ष्य को वे आगे बढ़ा सके। अपनी सफलता से प्रोत्साहित होकर, अछूतों ने नासिक के सबसे पवित्र मंदिर में प्रवेश पाने के अधिकार के लिए लड़ने का निश्चय किया। पांच वर्ष तक उन्होंने कलाराम मंदिर के सामने सत्याग्रह किया। उन्होंने वहां के वृहद वार्षिक मेले में जाने वाले तीर्थयात्रियों के लिए इस सीमा तक रूकावटें पैदा की कि मेला नहीं लग सका। उन्होंने उस घाट पर स्नान किया जो अब तक उनके लिए बंद था क्योंकि इससे पवित्र गोदावरी का जल प्रदूषित हो जाता। अनेक लोग, जिनमें बहुत सी महिलाएं भी थीं, जेल गए और यद्यपि अछूतों को उस समय तक मंदिर में प्रवेश का अधिकार नहीं मिला, लेकिन सत्याग्रह समाप्त करने तक उन्होंने यह दिखा दिया कि वे एक हो सकते हैं और सवर्ण हिदुंओं को उन्होंने यह झटका दिया कि उनकी धमकियों से दुखी होकर वे लोग सदैव के लिए हिन्दुत्व से नाता तोड़ लेंगे।
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राजनीतिक क्रियाकलाप
डॉ. अम्बेडकर अछूतों के नेता के रूप में राजनीति में प्रख्यात हो चुके थे। उन्हें 1926 में मुंबई विधान परिषद् (लेजिस्लेटिव कौंसिल) के लिए मनोनीत किया गया और ग्यारह वर्ष बाद बंबई विधान सभा के लिए बंबई नगर से अनुसूचित जातियों के प्रतिनिधि के रूप में चुना गया। वह लंदन में हुई तीन गोलमेज सभाओं में तथा उस संयुक्त संसदीय समिति में अपने लोगों के लिए लड़े जिसने वह विधेयक तैयार किया था जो भारत सरकार अधिनियम, 1935 का आधार बना।
उनके राजनैतिक जीवन की सबसे उल्लेखनीय घटना है नए संविधान में सुरक्षा उपायों के मुद्दों पर महात्मा गांधी से मतभेद। डॉ. अम्बेडकर ने अनुसूचित जातियों के लिए कतिपय सुरक्षा उपायों की मांग की। ब्रिटिश सरकार सुरक्षा उपायों के बारे