डॉ. बी. आर. अम्बेडकर-जीवन-झाँकी - Page 22

डा. बी. आर. अम्बेडकर जीवन-झॉकी 19

में जो प्रावधान बनाना चाहती थी उसके विरुद्ध गांधी जी ने आमरण अनशन कर दिया। इस संघर्ष का परिणाम यह हुआ कि डॉ. अम्बेडकर और गांधी जी के बीच समझौता हुआ जिसे पूना पैक्ट के नाम से जाना जाता है। इस समझौते के अनुसार नए संविधान के अधीन प्रांतीय विधान सभा के निचले सदन के निर्वाचनों में अछूतों के लिए सीटें आरक्षित कर दी गई।

नए अधिनियम के अधीन हुए प्रथम निर्वाचन में डॉ. अम्बेडकर ने अपने प्रांत बंबई में और कुछ हद तक केंद्रीय प्रांतों में अपने अनुयायियों को संगठित किया। बंबई में अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित 15 सीटों में से 11 सीटें स्वतंत्र लेबर पार्टी को मिली। रत्नागिरी जिले में उनकी पार्टी से खड़े किए गए सवर्ण हिंदू उम्मीदवारों ने दो सीटों पर कब्जा कर लिया जो दलित वर्गों के लिए आरक्षित नहीं थी। केंद्रीय प्रांतों में दलित वर्गों के अधिकांश विजेता उम्मीदवार गैर-कांग्रेसी थे और वे डॉ. अम्बेडकर के अनुयायी थे।

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डॉ. अम्बेडकर का व्यक्तित्व राष्ट्रीय स्तर का था, फिर भी वह छुआछूत के कलंक से नहीं बच सके। वर्ष 1929 में जब वह अछूतों की कुछ शिकायतों की छानबीन करने वाली समिति में काम कर रहे थे तो वह खानदेश जिले में गए और वहां चालीसगांव नामक स्थान पर स्थानीय महारों ने उनका स्वागत किया। रेलवे स्टेशन पर बहुत देर इंतजार करने के पश्चात उन्हें एक तांगे में बैठाया गया। तांगा महारवाड़ा की ओर चल पड़ा जहां महारों की बस्ती थी। तांगे वाला अनाड़ी और अनुभवहीन था और एक पुलिया पर घोड़ा अड़ गया जिससे डॉ. अम्बेडकर पथरीले रास्ते पर गिर गए और गंभीर रूप से घायल हो गए। तब उन्हें पता चला कि अछूतों को तांगा कठिनाई से मिलता है और चूंकि कोई तांगा चालक उन्हें लेकर जाने को तैयार न था इसलिए महारों में से एक ने स्थिति को संभाला, पर अपने नेता के प्रति होने वाले जोखिम की ओर ध्यान नहीं दिया।

डॉ. अम्बेडकर और उनके कुछ सहयोगी कर्मचारी भ्रमण के लिए निजाम के राज्य में स्थित दौलताबाद किले में गए। जब वे किले में पहुंचे तो धूल-धूसरित हो रहे थे और अनायास ही एक तालाब से पानी लेकर हाथ-मुंह धोने लगे। जिस समय वे अंदर जाने की अनुमति ले रहे थे, एक बूढ़ा मुसलमान दौड़ कर आया और उसने शोर मचाया ‘‘ढेड़ों (अछूतों) ने तालाब अपवित्र कर दिया है।’’ स्थिति गंभीर हो गई, मुसलमानों के तेवर से क्षुब्ध डॉ. अम्बेडकर ने कहा ‘‘क्या यही आप का धर्म सिखाता है? क्या किसी अछूत को यदि वह मुसलमान बन जाए आप इस तालाब से