35. कारखाना (दूसरा संशोधन) विधेयक - Page 212

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ऽकारखाना (दूसरा संशोधन) विधेयक

@ कारखानों के कर्मचारियों के सवेतन अवकाश

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर (श्रम सदस्य)ः श्रीमन्, मैं प्रस्ताव करता हूं -

‘‘कि कारखाना अधिनियम, 1934 में और संशोधन करने वाले विधेयक (दूसरा

संशोधन) को एक प्रवर समिति को सौंपा जाए जो नवाब सिद्दीकी अली खां,

खान बहादुर शेख-फैज-ए-हक पिराचा, श्री आर.आर. गुप्त, श्री ए.सी. इन्सकिप,

सर विट्ठल एन. चन्दावरकर, राव बहादुर, एन. शिवराज, श्री एन. एम. जोशी,

श्री डी.एस. जोशी और प्रस्तावक द्वारा गठित की जाए और समिति की बैठक

के लिए पांच सदस्यों की उपस्थिति अनिवार्य होगी।

विधेयक के उपबंध दो भागों में आते हैं और मैं समझता हूं कि प्रस्तुतीकरण में सरलता के लिए यह उचित रहेगा कि सदन में विधेयक का स्पष्टीकरण मैं दो भागों में करूं।

विधेयक का पहला भाग अनिवार्य छुट्टियों की हानि उठाने के बदले पूरक छुट्टियां दिए जाने के संबंध में है। सदस्यों को मालूम होगा कि कारखाना अधिनियम की धारा 35 में कारखाना मालिकों अथवा प्रबंधकों के लिए यह बाध्यता है कि वे कारखाने के प्रत्येक वयस्क कर्मचारी को एक दिन का अनिवार्य अवकाश दें। धारा 35 की यह व्यवस्था धारा 43 और 44 पर आधारित है। धारा 43 और 44 में कहा गया है कि धारा 35 में जो बाध्यता है उसमें कारखाना निरीक्षक द्वारा कारखाना व्यवस्थापकों या मालिकों को छूट दी जा सकती है। अब यह विचार है कि जब ऐसी छूट दी जाए तो जितनी बार छूट दी गई है। उसकी उतनी ही बार क्षतिपूर्ति की जाए। कर्मचारी के स्वास्थ्य और दक्षता के लिए यह आवश्यक है कि उसे विधि में उल्लिखित वांछित

ऽ विधान सभा वाद-विवाद (केंद्रीय), खंड 4, 1 नवम्बर, 1944 पृष्ठ 89-91

@ पैराओं के शीर्षक, इंडियन इनफोर्मेशन, 15 अगस्त, 1944, पृष्ठ 600-601 से लिए गए हैं।