188 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
छुट्टियों के बराबर छुट्टियां दी जाएं। मौजूदा अधिनियम में पूरक छुट्टियों की व्यवस्था नहीं है। परिणामस्वरूप इस खामी को दूर करने के लिए विधेयक में खंड 2 प्रस्तावित किया गया है। अब प्रांतीय सरकारों को यह स्वतंत्रता होगी कि वे कुछ समायोजनों के साथ नियम बना सकें कि यदि यह छूट धारा 35 के अधीन दी गई है तो कर्मचारियों को समतुल्य क्षतिपूर्ति की जाए। विधेयक का यह प्रथम भाग है।
श्रम सम्मेलन
अब मैं विधेयक के दूसरे भाग पर आता हूं। इसमें प्रावधान है कि कर्मचारियों को सवेतन अवकाश दिया जाए। यह बताना आरंभ में ही उचित होगा कि विधेयक के इस भाग का मूल उद्देश्य क्या है। सदन के अनेक सदस्यों को याद होगा कि 1936 में अंतर्राष्ट्रीय श्रम सम्मेलन के अधिवेशन में सवेतन छुट्टियों के बारे में एक प्रस्ताव पास हुआ था। भारत सरकार ने इस अंतर्राष्ट्रीय श्रम सम्मेलन में प्रतिनिधित्व किया था परंतु वह अधिवेशन के इस प्रस्ताव को स्वीकार करने की स्थिति में नहीं थी। सरकार ने 26 जुलाई, 1937 को विधान सभा में एक प्रस्ताव पेश किया जिसमें कहा गया था कि वह अधिवेशन की बात को स्वीकार नहीं करती है। प्रस्ताव पास हो गया। परंतु यद्यपि सरकार ने उस समय यह स्वीकार करने में अपनी असमर्थता दिखाई, तथापि संबंधित प्रभारी सदस्य ने कहा कि सरकार उक्त प्रस्ताव के परिपालन की संभावनाओं का पता लगाएगी और यदि पूरी तरह नहीं तो कुछ हद तक, उसके परिपालन के लिए प्रांतीय सरकारों से तथा मालिकों और मजदूरों से परामर्श करेगी और मालूम करेगी कि इस मुद्दे पर कितनी सहमति है। विधेयक के उपबंधों का यह दूसरा भाग सवेतन अवकाश के बारे में है और कई वर्षों के विचार-विमर्श का परिणाम है।
स्थायी कारखाने
अब मैं स्वयं विधेयक पर आता हूं। आप देखेंगे कि यह विधेयक कारखानों के बारे में है परंतु कारखानों पर लागू न होकर केवल स्थायी कारखानों पर लागू होता है। इसमें संदेह नहीं कि इस विधेयक की विषयवस्तु 1936 में आयोजित सम्मेलन के प्रावधानों की अपेक्षा सीमित है। जहां तक अन्य प्रावधानों के संबंध में है। मैं समझता हूं कि यदि उन्हें चार भागों में विभाजित कर दिया जाए तो उचित होगा क्योंकि यह सवेतन छुट्टी के चार अलग-अलग मुद्दों पर विचार करने के लिए आवश्यक हैः
(1) छुट्टी की अवधि_ (2) छुट्टी के अधिकार की पात्रता_ (3) शर्तों की सीमाएं, और (4) छुट्टी की अवधि का वेतन। छुट्टी की अवधि का प्रश्न एक ऐसा विषय है जिसका उल्लेख नई धारा 49ख में है जिसके विषय में विधेयक में प्रस्ताव किया गया है कि इसे कारखाना अधिनियम में शामिल कर लिया जाए। इस