192 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
अपने भाषण में मेरे मित्र श्री जोशी ने कुछ मुद्दे उठाए हैं। मैं स्वीकार करता हूं कि उनके दो मुद्दे ठोस हैं। उनका पहला मुद्दा है कि हम विधेयक की परिधि सीमित कर रहे है।, हमने इसे एक कारखाने तक सीमित रखा है और हम यह सिद्धांत एक पूरे उद्योगों पर अपनाने को सहमत नहीं है। मैं स्वीकार करता हूं कि इस बात में दम है, परंतु साथ ही मैं यह कहूंगा कि किसी उद्योग पर लागू करने का अर्थ होगा कि हमें कोई तरीका निकालना होगा जिससे कि उस उद्योग विशेष की सारी इकाइयों के साधनों का एक कोष बनाया जा सके। जैसाकि मैंने कहा, उनके द्वारा उठाए गए मुद्दे से मुझे महानुभूति है, परंतु फिलहाल, ऐसा कोष बनाने का अनुभव न होने के कारण जिसके द्वारा किसी उद्योग विशेष में आने वाले सभी कारखानों से कहा जाए कि वे उन फुटकर छुट्टियों का वेतन भुगतान करें जो भिन्न-भिन्न कारखानों में भिन्न-भिन्न कर्मचारियों ने अर्जित की हैं। यही कारण है कि किसी संपूर्ण उद्योग के लिए ऐसा करना संभव नहीं होगा।
श्री जोशी ने दूसरी बात यह कही कि उन्हें शिकायत है कि अधिनियम में उल्लिखित छुट्टी की अवधि कम है। मैं स्वीकार करता हूं कि उनकी इस बात में काफी दम है। 7 दिन के अवकाश की अवधि बहुत कम है, इस बारे में भी मेरे समक्ष एक अन्य कठिनाई है। वह एक ऐसी कठिनाई है जिसे श्री जोशी और सर विट्ठल चन्दावरकर दोनों स्वीकार करेंगे। उस कठिनाई का कारण हमारे सर विट्ठल चन्दावरकर दोनों स्वीकार करेंगे। उस कठिनाई का कारण हमारे कामगारों की उच्छिन्न प्रकृति है। जैसा श्री जोशी और सर विट्ठल भाई चन्दावरकर दोनों जानते हैं, विविध कारणों से ली जाने वाली लंबी छुट्टी और इस आदत के कारण काम से अनुपस्थिति के परिणामस्वरूप स्थिति जटिल हो जाती है। यदि हमारे श्रमिक कारखाने में आजकल की अपेक्षा अधिक समय तक नियमित रूप से काम करते रहे तो मैं बिल्कुल मान जाऊंगा कि छुट्टी की मौजूदा अवधि बढ़ाना बहुत अच्छी बात होगी। पंरतु मुझे आशा है कि हमने सात दिन की जो व्यवस्था की है उसका देश के श्रमिक और कर्मचारी वर्ग पर परोक्ष रूप से यह प्रभाव पड़ेगा कि उन्हें अहसास होगा कि यदि वे आजकल की अपेक्षा अधिक समय तक लगातार कार्य करते रहेंगे तो सात दिन से अधिक छुट्टियों के लिए उनका दावा मजबूत होगा। मैं सोचता हूं कि इस समय सात दिन की छुट्टी की अवधि बढ़ाने का औचित्य नहीं होगा। मेरा विचार है कि सम्मेलन में भी यही सिफारिश की गई थी।
श्रीमन्, जो दूसरा मुद्दा उठाया वह भी उसी प्रश्न से संबंधित है कि इस अधिनियम को अस्थायी कारखानों में भी लागू किया जाए। यह मुद्दा दूसरे पक्ष में बैठे मेरे माननीय मित्र प्रो. रंगा ने उठाया था। इस प्रश्न पर भी मेरे वही उत्तर हैं कि सात दिन के सवेतन अवकाश की व्यवसायी उन्हीं श्रमिकों के लिए की गई है जिन्हें पर्याप्त