कारखाना (दूसरा संशोधन) विधेयक
193
समय तक विश्राम नहीं मिलता। अब, एक अस्थायी कारखाना ऐसा कारखाना है जहां लोगों को लंबी अवधि तक विश्राम नहीं मिलता। इसका कारण यह हो सकता है कि लोगों को मजबूरन काम करना पड़ता है। परंतु मैं इस बात पर रोजगार और बेरोजगार की दृष्टि से विचार नहीं करता। जहां तक विधेयक का संबंध है, मैं इस बात पर विश्राम ही दृष्टि से विचार करता हूं और जहां तक अस्थाई कारखानों का प्रश्न है, श्रमिक निश्चय ही लंबी अवधि के विश्राम रखते हैं ताकि यह न कहा जा सके कि उनके लिए सात दिन के सवेतन अवकाश की बहुत आवश्यकता है जैसाकि स्थायी कारखानों में दिया जाता है।
सर विट्ठल चन्दावरकर ने संशोधन करने वाले एक खंड में उल्लिखित शब्द ‘‘कम से कम’’ का मुद्दा उठाया है। उन्होंने आशंका प्रकट की है कि संशोधन खंड में जहां तक ‘‘कम से कम’’ शब्दों का प्रश्न है, प्रांतीय सरकारें आदेश दे सकती हैं कि कारखाना मालिकों को विवश नहीं किया जाएगा कि सात दिन से अधिक का अवकाश दें। मैं आश्वासन देता हूं कि मेरे कानूनी सलाहकार के अनुसार संशोधक
खंड के अधीन ऐसा संभव नहीं है कि प्रांत सरकारें कारखाना मालिकों को विवश कर सकें कि सात दिन से अधिक का अवकाश दिया जाए। सर विट्ठल चन्दावरकर ने एक और मुद्दा उठाया है कि अभी प्रस्तुत विधेयक द्वारा प्रस्तावित परिवर्तनों का समय नहीं आया है और उनके विचार से ये उपाय बाद में किए जा सकते हैं। वह चाहते हैं कि इसे निश्चय ही बीमारी बीमा अधिनियम, जिसके बारे में सरकार सोच रही है और प्रयत्नशील है, के बाद लाया जाए। मैं व्यक्तिगत रूप से इससे मतभेद रखता हूं। यदि मेरे पास समय होता है तो मैं अपनी बात के पक्ष में कुछ तर्क देता। मैं उनसे अनुरोध करूंगा कि औद्योगिक कर्मचारियों के लिए स्वास्थ्य बीमा पर वे प्रोफेसर अदारकर की रिपोर्ट पढ़ें जिसमें उन्होंने पृष्ठ 112 पर सुदृढ़ तर्क प्रस्तुत किए हैं कि सवेतन छुट्टी की व्यवस्था, जो बीमे से घनिष्ठता से जुड़ी है, व्यवस्था को सामाजिक बीमे से पहले लागू करना होगा। जैसा कि मैंने कहा, यह रिपोर्ट विधानमंडल के सदस्यों को उपलब्ध है और मैं वे बातें दोहरा कर सदन का समय नहीं लेना चाहता जो इस विषय में प्रोफेसर अदारकर ने कही है।
मान्यवर, एक अन्य मुद्दा जो दोनों ने उठाया वह यह है कि यह व्यवस्था अनिवार्य होगी या स्वैच्छिक। जहां तक विधेयक का संबंध है, मेरे विचार में एक अच्छा तरीका है कि एक ओर तो हमने यह कानूनी व्यवस्था कर दी है कि एक निश्चित अवधि की सेवा के पश्चात श्रमिक सवेतन अवकाश का अधिकारी होगा, परंतु इस विषय पर मालिकों और कर्मचारियों के बीच कोई स्वैच्छिक समझौता भी हो सकता है। जैसा कि माननीय सदस्यों ने देखा होगा, विधेयक में एक खंड में कहा गया है कि यदि सरकार को संतुष्टि है कि किसी कारखाने के मालिक ने स्वेच्छा से अपने कर्मचारियों के लिए संवैतनिक छुट्टियों की ऐसी व्यवस्था की है जो इस विधेयक में