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ऽवेतन भुगतान (संशोधन) विधेयक
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ः (श्रम सदस्य)ः उपाध्यक्ष महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूंः-
‘‘कि वेतन भुगतान अधिनियम, 1936 में और संशोधन करने वाले विधेयक
को एक प्रवर समिति को सौंपा जाए जो सेठ युसुफ अब्दुल्ला हारून, श्री मुहम्मद
हुसैन चौधरी, श्री लालचंद नवलराय, श्री ए. सी. इंसकिय, सर विट्ठल एन.
चंदावरकर, श्री एन.एम. जोशी, डाक्टर सर रतन जी दिनशा दलाल, श्री डी.एस
जोशी और प्रस्तावना द्वारा गठित की जाए और समिति की बैठक के लिए पांच
सदस्यों की उपस्थिति अनिवार्य होगी।’’
श्रीमन्, वेतन भुगतान अधिनियम, 1936 में पारित किया गया था जिसमें अब कुछ संशोधन करने का प्रस्ताव है। जब यह विधेयक पास किया गया था तब इसे एक प्रायोगिक विधान समझा गया था। जब विधेयक का प्रारूप बन रहा था तो हमारे पास बतौर नमूना और कोई कानूनी नहीं था जिस पर हम इस कानून का ढांचा बना पाते। अब हमें इस कानून का 6 वर्ष का व्यावहारिक अनुभव है। इस बीच यह पाया गया कि इसमें बहुत सी खामियां हैं। मैं सदन को बताना चाहता हूं कि हमें यह कहा गया है कि 30 या 40 संशोधन आवश्यक हैं जिससे वेतन भुगतान कानून को सुधारा जा सके। भारत सरकार अनुभव करती है कि विविध वर्गों के सुझावों पर समयाभाव के कारण वह सभी संशोधनों पर विचार नहीं कर पाई है, इसलिए वह स्वयं अधिनियम में सुधार या इसमें सुझाई गई सभी खामियां दूर करने को तैयार नहीं है। मौजूदा संशोधनों के जरिए भारत सरकार कुछ कमियां दूर करना चाहती है जिनका इतना प्रशासनिक महत्व है कि उन्हें दूर किए बिना वह उद्देश्य प्राप्त नहीं किया जा सकता जो तब अपेक्षा थी जब यह अधिनियम बना था।
श्रीमन्, हम विधेयक को खंडवार लेते हैं। विधेयक के खंड 2 का उद्देश्य शब्द ‘‘वेतन’’ की परिभाषा में कतिपय संशोधन करना है। मैं सदन का अधिक समय नहीं
ऽ विधान सभा वाद-विवाद (केंद्रीय), खंड 4, 16 नवम्बर, 1944 पृष्ठ 889-92