36. वेतन भुगतान (संशोधन) विधेयक - Page 222

वेतन भुगतान (संशोधन) विधेयक

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लेना चाहता और उन खामियों का क्रमवार जिक्र बार-बार नहीं करना चाहता जो विधेयक में विभिन्न दलों ने बताई है और कहा है कि मौजूदा शब्द ‘‘वेतन’’ की परिभाषा दोषपूर्ण है। परंतु मैं कुछ उल्लेख करना चाहता हूं। बंबई उच्च न्यायालय ने एक न्यायिक फैसले में कहा है कि ‘‘वेतन’’ शब्द की मौजूदा परिभाषा इस प्रकार तैयार की गई है कि कोई श्रमिक न केवल उस वेतन का दावा कर सकता है जो उसने अर्जित किया है बल्कि वह संभावित वेतन-ऐसा वेतन जो उसने कमाया होता- की मांग भी कर सकता है। इस मूल व्यवस्था का यह उद्देश्य बिल्कुल नहीं था। इसमें एक और कमी बताई गई है कि किसी श्रमिक को यदि उत्पादन की मात्रा के आधार पर नियुक्त किया गया है, तो भी वह अपने पूरे वेतन का दावा कर सकता है, भले ही उसने उतना उत्पादन न किया हो। कहा गया है कि इस परिभाषा में भ्रांति है जो किसी ऐसे श्रमिक के मामले में जिसे निश्चित अवधि के लिए रखा गया है और ऐसे श्रमिक के मामले में जिसे उत्पादन की मात्रा के आधार पर रखा गया है, भेद नहीं कर सकती। कुछ पक्षों का कहना है कि इस परिभाषा में उल्लिखित बहुत से शब्द फालतू है, उनकी आवश्यकता नहीं है, और उनके कारण भ्रांति ही फैलती है। मैं कुछ शब्दों का उल्लेख कर सकता हूं जैसे कि शब्द ‘‘इसमें कोई बोनस अथवा इसके उपरोक्त में वर्णित अतिरिक्त देय धनराशि शामिल हैं।’’ हमें बताया गया है कि इन शब्दों की कोई आवश्यकता नहीं है। यह भी बताया गया है कि ‘‘वेतन’’ की यह परिभाषा उस समय तो पर्याप्त थी जब युद्ध के पूर्व मंहगाई भत्ते की व्यवस्था नहीं थी परंतु आज यह परिभाषा अर्पाप्त है क्योंकि कोई भी मालिक कह सकता है कि महंगाई भत्ता वेतन का भाग नहीं है।

अब जो परिभाषा हमने सुझाई है उसका प्रयोजन इन सब कठिनाइयों को दूर करना है। इससे परिभाषा सरल बन गई है। मैं सदन को बताना चाहता हूं कि मुझे स्वयं को भी विश्वास नहीं है कि विधेयक में संशोधन का जो प्रारूप रखा गया है उसमें यह आशय मौजूद है या नहीं जो मूल अधिनियम में हैं। मैं नहीं समझता कि प्रस्तावित परिभाषा ब्रह्म वाक्य है और यदि प्रवर समिति के सदस्य इसमें सुधार करना चाहते हैं तो निश्चय ही मुझे उसके और संशोधन करने में आपत्ति नहीं होगी।

अब मैं खंड 3 पर आता हूं। इस खंड के अनुसार मौजूदा खंड 5 में दो संशोधन रखे गए हैं। माननीय सदस्यों को याद होगा कि खंड 5 में व्यवस्था है कि किस समय वेतन दिया जाए और इस उद्देश्य से कारखानों को दो श्रेणियों में विभक्त किया गया है। पहली श्रेणी वह है जिन कारखानों में कर्मचारियों की संख्या एक हजार तक है। दूसरी श्रेणी में वे कारखाने हैं जिनमें एक हजार से ज्यादा कर्मचारी हैं। यह