198 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
वर्गीकरण करने के बाद इस खंड में व्यवस्था की गई है कि पहली श्रेणी में भुगतान 7 दिन के अंदर कर दिया जाना चाहिए और दूसरी श्रेणी में भुगतान 10 दिन के अंदर किया जा सकता है। वास्तविकता यह है कि इस धारा की शर्तों का पालन मुश्किल है और इसका कारण सीधा है। कारखानों का वर्गीकरण कर्मचारियों की संख्या के आधार पर किया गया है और इसमें सदा परिवर्तन होता रहता है। उदाहरणार्थ, यदि एक कर्मचारी कम हो जाता है तो कोई कारखाना पहली श्रेणी से दूसरी में चला जाता है। इसी प्रकार, एक कर्मचारी की संख्या बढ़ने से वह पहली श्रेणी में चला जाएगा। समझा जाता है, और यह ठीक ही है कि यह व्यवस्था न तो न्यायसंगत है और न ही प्रशासनिक दृष्टि से व्यावहारिक। प्रस्तुत संशोधन का उद्देश्य इस विभेद को मिटाना है जिसके अनुसार कारखानों को श्रेणियों में बांधा गया है। हमारा उद्देश्य सभी कारखानों के लिए सामान्य सिद्धांत लागू करना है। कर्मचारियों की संख्या को आधार बनाने के बजाए सभी के लिए एकसमान नियम बनाया जाना चाहिए ताकि भुगतान दस दिन में कर दिया जाए। खंड 3 में जिस दूसरे संशोधन का सुझाव है वह भी बहुत आवश्यक है। धारा 5 में कार्यमुक्त कर्मचारी को भुगतान की व्यवस्था की गई है। मौजूदा धारा के अनुसार, कार्यमुक्त कर्मचारी को दूसरे कार्य दिवस को ही भुगतान कर दिया जाना चाहिए। श्रीमन्, वेतन भुगतान अधिनियम केवल उन्हीं स्थायी कारखानों पर ही लागू होता है जो पूरे दिन काम करते हैं। इस संबंध में इस धारा के कारण कोई कठिनाई नहीं है। परंतु मौसमी कारखानों के मामले में कठिनाई है जो जायज लगती है क्योंकि यदि किसी कर्मचारी को अंतिम कार्य दिवस पर कार्यमुक्त किया जाता है और कारखाना मौसमी होने के कारण बंद हो जाता है, तो दूसरा कार्य दिवस लंबे अंतराल के बाद आएगा और कर्मचारी को क्या कठिनाई होगी इसकी कल्पना की जा सकती है। यदि व्यवस्था न बदली गई तो मौसमी कारखाने के किसी कार्यमुक्त कर्मचारी का वेतन भुगतान अनिश्चित काल के लिए स्थगित हो जाएगा। अब हमने विधेयक में यह संशोधन रखा है कि शब्द ‘‘कार्य’’ को हटा दिया जाए और शब्द ‘‘दूसरे’’ के स्थान पर ‘‘तीसरे’’ को प्रतिस्थापित कर दिया जाए जिससे कि कारखाने मौसमी हो या स्थाई प्रत्येक कार्यमुक्त कर्मचारी के सातवें दिन भुगतान किया जाएगा और उसे इतना इंतजार नहीं करना पड़ेगा जितना मौजूदा हालात में करना पड़ सकता है।
अब मैं विधेयक के खंड 4 पर आता हूं। खंड 4 का तात्पर्य इस अधिनियम की धारा सात में संशोधन करना है। धारा 7 में वर्णित है कि कर्मचारी के वेतन में से क्या-क्या कटौतियां की जा सकती हैं। माननीय सदस्य देखेंगे कि फिलहाल इस धारा के अधीन सभी वैध कटौतियों का जिक्र नहीं है। मैं माननीय सदस्यों का ध्यान इस