36. वेतन भुगतान (संशोधन) विधेयक - Page 228

वेतन भुगतान (संशोधन) विधेयक

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@ माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः श्रीमन्, जैसा कि मैंने कहा, मैं वह प्रस्ताव स्वीकार करने को तैयार हूं जो मेरे मित्र श्री जोशी ने किया है। इस हालत में मुझे बोलना अनावश्यक है। मैं इतना ही कहना चाहता हूं कि मैं इससे सहमत नहीं कि जनमत के लिए परिचालित करने के पक्ष में कोई ठोस बात कही गई हो। जैसा कि मैंने अभी कहा, मैंने अपनी ओर से साफ कर दिया है कि जो संशोधन मैंने रखे हैं वे प्रशासनिक हैं, इनसे वे कठिनाइयां दूर होंगी जो कानून को लागू करने में उपस्थित होती हैं। मैं कह सकता हूं कि मुझे इनमें ऐसा कोई संशोधन दिखाई नहीं पड़ता जो प्रवर समिति के माननीय सदस्यों के समझ, ज्ञान और जानकारी के बाहर हो। श्रीमन्, मुझे यह देखकर आश्चर्य हुआ कि मेरे मित्र श्री जोशी ने स्वयं कोई ठोस बात नहीं कही। मुझे समझ में नहीं आता कि श्री जोशी और मैंने माननीय मित्र श्री लाल चंद नवल राय के सिवाय और कौन वकील होगा जिनकी सेवाएं श्रमिक वर्ग लेगा। उनके प्रतिनिधि चरित्र को ध्यान में रखते हुए और उनके ज्ञान और जानकारी को देखते हुए ही हमने उन्हें प्रवर समिति में रखा है। फिर भी श्रीमन्, यदि वे अनुभव करते हैं कि इन गैर-विवादास्पद मुद्दों पर पवर समिति में अपना पक्ष रखने की अपनी क्षमता पर उन्हें विश्वास नहीं हैं, तो मैं उनका अनुकरण करने को तैयार हूं और संशोधन स्वीकार करता हूं।

उपाध्यक्ष महोदय (श्री अखिल चंद दत्त)ः प्रश्न हैः

‘‘कि विधेयक को उस पर 28 फरवरी, 1945 तक लोकमत जानने के लिए परिचालित किया जाए।’’

प्रस्ताव स्वीकृत हुआ।