दामोदर घाटी योजनाः कलकत्ता सम्मेलन
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‘‘विचार-विमर्श के दौरान यह अनुभव किया गया कि यदि वन और नदियां केंद्र सरकार के अधीन हों तो बाढ़ नियंत्रण से लाभ होगा और बाढ़ नियंत्रण तथा भू-संरक्षण समस्याओं का समाधान होगा।’’
सिफारिश 8 में समिति ने सुझाव दिया कि दामोदर पर बांध से केवल बाढ़ ही नहीं रुकेगी अपितु बिजली भी तैयार हो सकेगी और सिंचाई के लिए पानी भी प्राप्त होगा। जिन्हें मौजूदा नीति या नीति की कमी का पता है, वे भारत के जल संसाधनों के उपयोग की बात स्वीकार करेंगे। इसके महत्व को कम करके नहीं माना जा सकता। यह कहना सही नहीं है कि जलमार्गों के विकास की कोई अनुकूल अखिल भारतीय नीति नहीं है। दूसरे, यह ठीक से अहसास नहीं है कि हमारी जलमार्ग नीति बहुउद्देश्यीय होनी चाहिए ताकि उसमें सिंचाई, विद्युतीकरण और नौवहन को भी सम्मिलित किया जा सके।
रेलवे और जलमार्ग
हमारी जलमार्ग नीति का एकमात्र उद्देश्य सिंचाई रहा है। फिर हमने इस पर भी ठीक से विचार नहीं किया है कि रेलमार्ग और जलमार्ग में कोई अंतर नहीं है और यदि रेलवे को प्रांतीय सरकारों के अधीनस्थ नहीं किया जा सकता तो जलमार्गों को भी उन्हें नहीं दिया जा सकता क्योंकि नदियां भी एक प्रांत से दूसरे प्रांत में जाती हैं। इसके विपरीत, हमने अपने संविधान में व्यवस्था की है कि रेलवे और जलमार्गों के बीच अंतर रखा जाए। इसी कारण रेलवे केंद्र के पास हैं और जलमार्ग प्रांतों के पास हैं।
इस गलती की कई और स्पष्ट हानियां हैं। उदाहरण के रूप में, वह किसी प्रांत को बिजली की आवश्यकता है और इस उद्देश्य से वह जल संसाधनों का उपयोग करना चाहता है। परंतु वह ऐसा नहीं कर सकता क्योंकि जिस स्थान पर वह बांध बना सकता है वह दूसरे प्रांत में पड़ता है और उस प्रांत को इसमें कोई दिलचस्पी नहीं है या उसके पास खर्च करने को धन नहीं है और वह आवश्यकता वाले प्रांत का उपयोग के लिए स्थान नहीं देना चाहता। हम चाहे जो भी शिकायत करें, फिर भी प्रांत इस प्रकार का अमैत्रीपूर्ण व्यवहार कर सकता है और प्रांतीय स्वायत्तता का प्रश्न उठाकर इसे न्यायसंगत ठहरा सकता है।
जल संसाधनों का उपयोग
मैंने दो उद्देश्यों से ऐसा कहा। इस पृष्ठभूमि में, बंगाल सरकार द्वारा गठित दामोदर नदी बांध जांच समिति की सिफारिशों का आप बेहतर मूल्यांकन कर सकेंगे जिनका मैंने जिक्र किया। मेरा दूसरा उद्देश्य आप को यह बताना है कि भारत सरकार को इस बात का पता है कि मौजूदा हालात में क्या हानि हो रही है और वह एक ऐसी नीति बनाना चाहती है कि देश के जल संसाधन का ज्यादा से ज्यादा उपयोग किया