37. दामोदर घाटी योजना : कलकत्ता सम्मेलन - Page 231

206 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

जाए और जल संसाधानों का उन उद्देश्यों के लिए उपयोग किया जाए जिनके लिए अन्य देशों में होता है।

जलमार्गों को संविधान परिवर्तन द्वारा वही स्थान देना जो रेलवे को प्राप्त है निस्संदेह एक स्वागत योग्य परिवर्तन होगा। परंतु भारत सरकार यह आवश्यक नहीं मानती कि संविधान के परिवर्तन तक प्रतीक्षा की जाए। न ही सरकार यह समझती है कि यदि प्रांत सरकारें जल संसाधनों के उपयोग के लिए सहयोग करना चाहें तो संवैधानिक कठिनाइयां आड़े आएंगी।

भारत सरकार के ध्यान में अमरीका की टेनेसी घाटी परियोजना है। हम इस योजना का अध्ययन कर रहे हैं और अनुभव करते हैं कि यदि प्रांतीय सरकारें सहयोग की पेशकश करें या प्रांतीय अवरोध समाप्त कर दिए जाएं, जिनसे उनकी सम्पन्नता और प्रगति अवरुद्ध है, तो भारत में भी उसी ढंग से काम किया जा सकता है। देश के जल संसाधनों को सर्वाधिक उपयोग करने के सरकार ने आरंभिक कदम के रूप में एक केंद्रीय तकनीकी बिजली बोर्ड नाम से एक केंद्रीय संस्था का गठन किया है और एक अन्य संगठन केंद्रीय जलमार्ग सिंचाई और नौवहन आयोग नाम से बनाने का विचार है।

इन दो संगठनों की स्थापना का उद्देश्य प्रांत सरकारों को सलाह देना है कि उनके जल संसाधनों का अधिकतम उपयोग किस प्रकार किया जा सकता है और किस प्रकार किसी परियोजना द्वारा सिंचाई के अतिरिक्त अन्य उद्देश्य भी पूरे हो सकते हैं। अन्य संस्थाओं का गठन भी आवश्यक हो सकता है जैसे केंद्रीय उपयोग बोर्ड अथवा तदर्थ जांच समितियां केंद्रीय बिजली बोर्ड और केंद्रीय जलमार्ग, सिंचाई व नौवहन आयोग की स्थापना से ऐसे संगठन अनावश्यक नहीं हो जाते।

इस दिशा में दामोदर नदी पहली परियोजना है। यह एक बहुउद्देशीय परियोजना होगी। इसका उद्देश्य मात्र दामोदर नदी की बाढ़ रोकना ही नहीं है, बल्कि सिंचाई, नौवहन और बिजली उत्पादन भी है।

परियोजना तैयार हो जाने पर यह प्राधिकरण बहुत कुछ टेनेसी घाटी प्राधिकरण के मॉडल पर बनाया जाएगा। यह एक सहकारा उपक्रम होगा जिसमें बिहार और बंगाल की प्रांतीय सरकारें और केंद्र सरकार भागीदार होंगी। भारत सरकार इस परियोजना को आकार, स्वरूप और जीवन प्रदाना करना चाहती है। इसमें जरा सा भी समय नहीं गंवाना चाहिए।

जलमार्गों के लिए नई नीति

भारत सरकार अनुभव करती है कि जब तब आरंभिक संभावनाओं का पता नहीं लगा लिया जाए तब तक आगे न बढ़ा जाए। पहली बात बांध के स्थान का निर्णय