दामोदर घाटी योजनाः कलकत्ता सम्मेलन
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लेना है। परंतु यह केवल बंगाल की मर्जी से नहीं हो सकता। साथ ही, इसका निर्णय केवल बिहार की इच्छाओं के अनुसार भी नहीं लिया जा सकता और यदि दोनों प्रांत सहमत हो भी जाएं तो विशेषज्ञों की सलाह के बिना अंतिम निर्णय नहीं लिया जा सकता। कई पक्षों पर विचार करना है। जैसाकि मैंने कहा, दामोदर परियोजना एक बहुउद्देशीय परियोजा है। हम चाहते हैं कि यह केवल बाढ़ की समस्याओं तक सीमित न रहे, इससे सिंचाई बिजली, और नौवहन की सुविधाएं भी प्राप्त होनी चाहिए। स्थान के प्रश्न के साथ इन मुद्दों पर भी विचार किया जाना है।
इस सम्मेलन का कार्य यह निर्णय करना है कि उक्त कार्य संपन्न करने के लिए सर्वोत्तम व्यवस्था क्या होगी। मेरा विचार है कि हम शुद्ध भाव से कार्य करें, संकीर्ण विचारों को त्याग दें और संकल्प के साथ सर्वोत्तम समाधान के लिए काम आरंभ करें और जल मार्ग की नई नीति प्रतिपादित करके एक नया मार्ग प्रशस्त करें तथा देश के करोड़ों गरीबों की सम्पन्नता की नींव डालें।
सम्मेलन में विचार-विमर्श
सम्मेलन ने एक बहुउद्देशीय दामोदर घाटी परियोजना पर विचार किया जिसका आशय दामोदर घाटी के दोहन द्वारा सिंचाई, विद्युतीकरण और नौवहन की संभावनाओं का पता लगाना है। इसकी अध्यक्षता डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ने की। विचार-विमर्श का आधार आवश्यक सूचना एकत्र करने की प्रक्रिया के बारे में केंद्र सरकार की ओर से जारी एक नोट था।
इस नोट में सुझाव दिया गया था कि तीनों सरकारें अपने पास उपलब्ध तथ्यों और आंकड़ों की सूची तैयार करें। यह सूची केंद्र सरकार के विशेषज्ञों की सलाह से तैयार की जाए और यदि सूची में पूरा वितरण नहीं दिया गया तो वांछित तथ्यों को फिर से एकत्रित किया जाए। तब केंद्र सरकार के तकनीकी विशेषज्ञ आरंभिक ज्ञापन तैयार करेंगे ताकि दामोदर घाटी के बहुउद्देशीय विकास का समन्वित कार्यक्रम तैयार किया जा सके। फिर तीनों सरकारें मिलकर विचार करेंगी तथा केंद्र और प्रांतीय सरकारों के तकनीकी विशेषज्ञों को परियोजना तैयार करने के विषय में निदेश देंगी।
सामान्य सहमति
जहां दामोदर योजना को बहुउद्देशीय बनाने पर आम सहमति थी, वहीं बंगाल सरकार के प्रतिनिधियों ने इस बात पर बल दिया कि दामोदर नदी की बाढ़ की समस्या के नियंत्रण के मुद्दे पर पहले विचार किया जाए। कुछ देर के विचार-विमर्श